धर्मांतरण को लेकर अब तक देश में चल रहे सियासी तीरों के बीच संत समाज भी अपनी भूमिका तय करने की कवायद में है। इस बार संगम तट पर लगने वाले माघ मेला में साधु-संतों की धर्मसभा में धर्मांतरण पर चर्चा होगी। इस दौरान धर्मांतरण पर संत समाज एक ठोस निर्णय लेने की योजना बना रहा है, जाहिर है ऐसे में मामला गरमा सकता है।
ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि जिनका विश्वास शास्त्रों में है वो हिंदू हैं। अगर प्रलोभन एवं विवशता में किसी का धर्मांतरण हुआ है और उसका विश्वास शास्त्रों में है तो घर वापसी होनी चाहिए। वहीं जो शास्त्रों में विश्वास नहीं रखता अगर वह धर्मांतरण करता है तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
शंकराचार्य के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में होने वाली धर्मसभा में धर्मांतरण पर चर्चा के लिए तेरह अखाड़ों के संत महंत एवं अन्य संप्रदाय के साधु एकत्र होंगे। संतों की इस सभा में सनातन देवी-देवताओं के मखौल उड़ाने वाली फिल्मों के बहिष्कार पर भी रणनीति तय होगी। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के प्रवक्ता एवं सचिव रामानंद ब्रह्मचारी के अनुसार माघ मेला शिविर में शंकराचार्य का प्रवेश दस जनवरी को होगा। मकर संक्रांति स्नान के बाद धर्मसभा आयोजित होगी। शंकराचार्य की अध्यक्षता में होने वाली धर्मसभा की तैयारी तेज है। शंकराचार्य के उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कार्यक्रम की कमान संभालेंगे।