इलाहाबाद। वोटर लिस्ट में नाम के साथ गालियां और अभद्र भाषा का प्रयोग। विश्वास नहीं होता लेकिन इलाहाबाद में ऐसा ही हुआ। विधानसभावार तैयार वोटर लिस्ट में एक परिवार के मतदाताओं को बदनाम करने के लिए उनके नाम के आगे गालियां लिख दी गईं। वोटर लिस्ट में लिखे इन अभद्र शब्दों पर जिसकी नजर पड़ी, उसने सरकारी व्यवस्था को जमकर कोसा। दुर्भाग्य कि अफसरों और निर्वाचन से जुड़े कर्मचारियों की अब तक इस पर नजर नहीं पड़ी और अगर किसी ने देखा भी तो विवाद से बचने के लिए चुप्पी साध ली।
वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने पूरी ताकत झोंक दी। करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। 2014 के चुनाव से लेकर अब वोटर लिस्ट संशोधन के लिए दर्जनों अभियान चलाए गए। इसके बावजूद वोटर लिस्ट में कुछ मतदाताओं के नाम के आगे लिखीं गालियां और अभद्र शब्द नहीं हटाए गए। मामला शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में रामानंद नगर अल्लापुर (बूथ नंबर-290) मुहल्ले का है।
वहां के सैकड़ों वोटरों में शामिल एक परिवार के सात सदस्यों के नाम भी वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। इस परिवार में तीन पुरुष और चार महिला मतदाता हैं। वोटर लिस्ट में महिलाओं के नाम आगे चरित्रहनन सूचक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, पुरुषों के नाम के आगे दलाल, 420 जैसे अभद्र शब्दों का प्रयोग किया गया है। तय है कि यह कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता है। वोटर लिस्ट में फोटो की स्कैनिंग, नाम-पता दर्ज करने जिम्मेदारी जिला प्रशासन से नियुक्त कोई एजेंसी करती है, सो इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर की सीधी भूमिका नजर आ रही है।
कंप्यूटर ऑपरेटर ने वोटर लिस्ट में इतनी बड़ गड़बड़ी कर दी और अफसरों का इस पर ध्यान भी नहीं गया। बूथ लेबल अफसर (बीएलओ) से लेकर उच्चाधिकारियों तक कई चरणों में जांच के बाद सूची फाइनल की गई। 2014 से अब तक कई बार वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण हुआ। वोटरों के नाम-पते संशोधित किए गए। साथ ही हजारों नए वोटरों के नाम जोड़े गए और बड़ी संख्या में नाम काटे भी गए लेकिन गालियों और अभद्र शब्दों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि 2014 का लोकसभा चुनाव भी इसी वोटर लिस्ट पर करा दिया गया।
‘वोटर लिस्ट में अगर ऐसी गड़बड़ी हुई है तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और मामले में सीधे संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर, वेंडर एवं बूथ लेबल अफसर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’
कौशल राज शर्मा, डीएम