इलाहाबाद(ब्यूरो)। पिछले चार-पांच दिनों में शहर में सफाई व्यवस्था में तेजी से सुधार हुआ है, लेकिन यह ज्यादा दिन रहने की उम्मीद नहीं है। ऐसा इसलिए कि नगर निगम आउटसोर्सिंग पर रखे गए सफाई कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रहा है। राज्य वित्त आयोग से काटी गई रकम से निगम के सामने कर्मचारियों को वेतन देने का संकट खड़ा हो गया है, जिसकी पहली गाज आउटसोर्सिंग कर्मियों पर ही गिरने वाली है।
राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली रकम में सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 60 फीसदी की कटौती कर ली है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार बैकफुट पर है। काटी गई रकम वापस करने की योजना बना रही है लेकिन यह प्रक्रिया काफी लंबी है। निगम को रकम वापस होने में करीब ढाई माह का वक्त लग सकता है। ऐसे में कर्मचारियों को वेतन देना निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हो गया है। कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन पर हर माह करीब नौ करोड़ रुपये व्यय होते हैं। रकम में कटौती के बाद निगम में मात्र 4.90 करोड़ रुपये मिल रहे हैं। निगम किसी तरह रकम की व्यवस्था कर कर्मियों को अप्रैल, मई, जून और जुलाई और अगस्त में वेतन दे सका है। अब सितंबर और उसके बाद अक्तूबर में वेतन के लिए निगम के पास रकम नहीं है।
व्यावसायिक भवनों से गृहकर की वसूली अब तक शुरू होने से निगम की वित्तीय स्थिति और लड़खड़ा गई है। ऐसे में निगम ने आउटसोर्सिंग कर्मियों की छंटनी की तैयारी है। वर्तमान में करीब 2000 नियमित और संविदा सफाई कर्मियों के अतिरिक्त नौ सौ कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर रखे गए हैं। इनकी संख्या आधी की जाएगी। नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि निगम के पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। कर्मियों की संख्या कटौती कब होगी, यह अभी तय नहीं हैं लेकिन उन्होंने कहा कि काटी गई रकम वापस होने पर आउटसोर्सिंग कर्मियों की संख्या फिर बढ़ाई जाएगी।