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पुण्य की डुबकी लगा लिया संकल्प

Mon, 25 Jan 2016 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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पौष पूर्णिमा पर्व पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ कल्पवास का संकल्प लिया। रविवार से महीने भर का गंगा स्नान, दान जप का अनुष्ठान प्रारंभ हो गया। श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन किया और कल्पवास के अनुशासन का व्रत लिया। तीर्थ पुरोहितों ने यजमानों को कल्पवास का संकल्प दिलाकर पूजा-अर्चना कराई। कल्पवासियों ने गंगा पूजन के बाद तुलसी का बिरवा लगाया और जौ बोया। 
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सुबह घने कोहरे में स्नान शुरू हुआ। कल्पवासियों के साथ ही पौष पूर्णिमा की डुबकी लगाने के लिए शहरी भी पहुंचे। जल में ही खड़े होकर श्रद्धालुओं ने अर्घ्य देते हुए सूर्योपासना की, फिर घाट किनारे पूजा-अर्चना पूरी की। गंगा और यमुना पट्टी में बैठे गंगापुत्र घाटियों के यहां यथाशक्ति दान, दक्षिणा दिया गया और रेती पर आसन जमाए घाटियों से ही तिलक चंदन लगवाया। पुरोहितों के पास गोदान कराने के लिए लोगों की कतार लगी। परिवार के जो लोग घर पर रह गए थे, उनके भी नाम से डुबकी लगाई, यथा सामर्थ्य दान दिया गया। कइयों ने सत्यनारायण की कथा सुनने के बाद शिविर में प्रवेश किया। 
संगम समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाने का क्रम भोर से पहले शुरू हुआ, लेकिन भीड़ विगत वर्षों के मुकाबले काफी कम रही। स्नानार्थियों के लिए मेला क्षेत्र में चौदह स्नान घाट बनाए गए थे। कल्पवासियों और विभिन्न संस्थाओं के शिविरों में बसे श्रद्धालुओं ने अपने शिविरों के पास बने घाटों पर ही स्नान किया। विभिन्न घाटों पर सुरक्षा बलों के साथ ही नागरिक सुरक्षा कोर के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को सहयोग करते रहे।
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संतों आचार्यों के शिविरों में सुबह से प्रसाद भंडारा शुरू हो गया। संगम नोज अक्षय वट मार्ग से लेकर पूरे मेला क्षेत्र में चाय और पूड़ी सब्जी का प्रसाद बंटता रहा। त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य शिविर, संगम नोज स्थित गंगा सेना शिविर से प्रसाद पाने के लिए आग्रह किया जाता रहा। संगम तट जाने वाले मार्ग पर ॐ नम: शिवाय के शिविर में चाय और उसके बाद कढ़ी भात का प्रसाद दोपहर दो बजे तक बंटता रहा। ओम वाहे गुरु शिविर में प्रसाद बंटता रहा। खाक चौक, दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा, काली सड़क, संगम अपर, संगम लोवर आदि मार्गों पर लगे संतों के शिविरों में भंडारा प्रसाद बंटता रहा।
पौष पूर्णिमा से माघ मेला क्षेत्र में संतों की वाणी गूंजने लगी है। त्रिवेणी मार्ग स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिविर में उनके प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कल्पवास के महात्म्य के बारे में बताया। कहा, माघ मास में संगम तट पर कल्पवास से पितर और देव प्रसन्न होते हैं और युवा पीढ़ी संस्कारित होती है। प्रवचन से पहले उन्होंने गंगा स्नानकर कल्पवास का संकल्प लिया।
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