मेला क्षेत्र में शनिवार सुबह से ही कल्पवासियों का रेला पहुंचने लगा लेकिन बेतरतीब ट्रैफिक व्यवस्था और बेवक्त की रिहर्सल के कारण कल्पवासियों को मेला क्षेत्र में प्रवेश के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। परेड मैदान से लगे जाम का असर मधवापुर, अलोपीबाग सहित आसपास के इलाकों तक दिखा। मेला क्षेत्र में ट्रैफिक की अगर यही हालत रही तो पौष पूर्णिमा के दिन हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
मेला क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक तरफ पुलिस के आला अधिकारी अपने कैम्प में चाय और कॉफी की चुस्कियों के बीच पुलिस कर्मियों के साथ बैठक कर रहे थे तो दूसरी ओर परेड मैदान पर काली सड़क के इंट्री प्वाइंट पर कल्पवासी जाम की समस्या से जूझ रहे थे। इंट्री प्वाइंट पर कैमरा भी लगा है, जिसके जरिये मेला क्षेत्र में स्थित पुलिस कैम्प में प्रसारण भी होता रहता है लेकिन अफसर इस बात से अनजान थे। अफसरों को मालूम था कि पौष पूर्णिमा पर कल्पवासियों का रेला अपने-अपने वाहनों से मेला क्षेत्र पहुंच रहा है।
उस वक्त काली सड़क से मेला क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति भी थी लेकिन इंट्री प्वाइंट पर तैनात पुलिस कर्मियों ने वाहनों को प्रवेश से रोक दिया। कल्पवासियों के वाहनों की लंबी कतार लगने से मौके पर जाम की जबर्दस्त समस्या पैदा हो गई। जाम इतना लंबा हो गया कि अलोपीबाग, मधवापुर सहित आसपास के इलाकों तक इसका असर पहुंच गया। जाम की समस्या जब नियंत्रण से बाहर हो गई तो अफसर मौके पर पहुंचे। अफसरों ने बताया कि ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर रिहर्सल की जा रही है। हालांकि अफसरों के इस बयान के बात यही चर्चा होती रही कि जब मालूम था कि कल्पवासियों का रेला मेला क्षेत्र में पहुंच रहा है तो बेवक्त रिहर्सल की क्या जरूरत थी।