दुराचार के मामले में फंसे कथित बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित सहित तकरीबन आधा दर्जन और बाबाओं को फर्जी सूची में डालने की तैयारी है। ऐसे बाबाओं को बेनकाब करने और उन पर नकेल कसने के क्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने यह कदम उठाया है। इसमें पूर्वांचल के एक बाबा सहित एक महिला धर्माचार्य भी शामिल है।
परिषद की शुक्रवार को मठ बाघंबरी गद्दी में होने वाली बैठक में फर्जी बाबाओं की र्नई सूची जारी की जाएगी। अब तक परिषद की ओर से आसाराम बाबू, निर्मल बाबा, गुरमीत सिंह राम रहीम, आचार्य कुशमुनि सहित चौदह बाबाओं की सूची जारी की गई है। दरअसल, परिषद से जुड़े सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे अपने मठाधिकार क्षेत्र में ऐसे बाबाओं की तलाश करके उनका नाम परिषद को सौंपे ताकि ऐसे लोगों को आगाह करते हुए शासन-प्र्रशासन से उनके बारे में कार्रवाई के लिए कहा जा सके।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि वीरेंद्र देव दीक्षित सहित ऐसे तमाम लोग धर्म और समाज की पवित्रता, शुचिता को धूमिल करने में जुटे हैं। ऐसे बाबाओं का सनातन धर्म और संत समाज से कोई लेना देना नहीं है। परिषद की ओर से जारी नई सूची को भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा ताकि उन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें समाज से बहिष्कृत किया जा सके। ऐसे लोगों को परिषद आगे भी चिन्हित करता रहेगा। उन्होंने मीडिया से भी ऐसे दुराचारियों को बाबा कहकर महिमामंडित न करने की अपील की है।
अखाड़ा परिषद का मानना है कि कथावाचकों को संत नहीं कहा जाना चाहिए। कथावाचक सिर्फ कथावाचक है। ऐसे लोग जो किसी परंपरा से जुड़े नहीं हैं, वे संत नहीं हो सकते हैं। ऐसे लोग मनमुखी संत हैं, भीड़ बटोरने से कोई संत नहीं हो जाता है। संत होने के लिए सनातन, संन्यासी, आचार्य, नाथ जैसी किसी परंपरा से जुड़ाव जरूरी है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की शुक्रवार को मठ बाघंबरी गद्दी में सुबह 11 बजे बैठक होगी। इसमें सभी तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधि जुटेंगे। बैठक का मुख्य मुद्दा कुंभ की तैयारियों पर विमर्श है लेकिन इसमें फर्जी बाबाओं की नई सूची भी जारी की जाएगी।