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वायरल फीवर का कहर, भाई बहन की मौत

Mon, 21 Aug 2017 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मौसम में हर दिन हो रहे बदलाव से संक्रामक बीमारियां पांव पसार रही हैं। शहर हो या गांव, हर जगह वायरल फीवर का कहर है। पीड़ितों में ज्यादातर बच्चे हैं। शहर के सरकारी और निजी अस्पताल बुखार के मरीजों से पटे हैं तो ग्रामीण इलाके में भी हालात बदतर हैं। मऊआइमा के महरौड़ गांव में रविवार को बुखार पीड़ित सगे भाई-बहन की मौत हो गई। गांव में बुखार पीड़ितों की संख्या 50 पार है। उमस भरी गर्मी में वायरल फीवर के साथ सर्दी-जुकाम, डायरिया, डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू के भी मरीज बढ़े हैं।
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हरखपुर प्रतिनिधि के मुताबिक मऊआइमा के महरौड़ा गांव की दलित बस्ती में कई दिन से वायरल फीवर का प्रकोप है। सभी उम्र के करीब 50 लोग बुखार से पीड़ित हैं। पीड़ितों में आधे से अधिक बच्चे हैं। इलाज के बाद भी पीड़िताें को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। दलित बस्ती के रामसजीवन के बच्चों में शबीना देवी (12), देवकी (9), सोना (6) और रोहित (5) कई दिन से बुखार से पीड़ित हैं। अधिकांश पीड़ितों ने सीएचसी हरखपुर से दवा ली लेकिन लोगों को आराम नहीं मिला। सिर दर्द और तेज बुखार से रविवार की सुबह रोहित की मौत हो गई। रोहित की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। अभी रोहित का अंतिम संस्कार करके लोग घर लौटे तो पता चला कि सोना की भी सांस थम गई। भाई-बहन की मौत से हड़कंप मच गया। पूरे गांव में मातम छा गया। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। बस्ती के मनोज कुमार के यहां भी बुखार का प्रकोप है।

प्रीति (9), राज (8),अरविंद (7), रविंद्र (6) को सिर दर्द और  तेज बुखार आ रहा है। इसी प्रकार अंजू (5) पुत्री लाल जी, सुमित (6) पुत्र खुन्नू, किशन(6) पुत्र सुरेश, आकाश(2) पुत्र अजय, गुंजा (4) पुत्री अजय, खुशबू (6) पुत्री अजय, विशाल (10) पुत्र अजस समेत दो दर्जन से अधिक बच्चे दिमागी बुखार की चपेट में चल रहे हैं। ग्राम प्रधान गुड्डी देवी में बुखार के प्रकोप की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी गई। सूचना पर सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि गांव में डॉक्टरों की टीम भेजी गई है। उन्होंने बताया कि गांव पहुंचे डॉक्टरों ने रिपोर्ट दी है कि लोग जल और मौसम जनित बीमारियों से पीड़ित हैं। गंदगी इसका कारण बनी है।
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उमस भरी गर्मी और तेज धूप के कारण शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भीड़ जुट रही है। एसआरएन, बेली, कॉल्विन और चिल्ड्रेन अस्पताल की ओपीडी में हर दिन पहुंचने वाले मरीजों में अधिकांश संक्रमण का शिकार हैं। किसी को वायरल फीवर तो किसी तो किसी को डायरिया या सर्दी-जुकाम की शिकायत है। गले में खराश और कंजेशन की शिकायत करने वाले भी अधिक हैं। शनिवार और रविवार को सरकारी अस्पताल पहुंचने वालों की संख्या 1000 से अधिक रही। पीड़ितों में बच्चे और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। वहीं नर्सिंग होम और निजी क्लीनिकों में भी पीड़ितों की भीड़ बढ़ी है।

वायरल फीवर पीड़ितों की तकलीफ इस कदर बढ़ती है कि शरीर और जोड़ों में दर्द के साथ सिर दर्द या सिर भारी होना आम शिकायत है। अब बुखार पीड़ित मरीज शक में डेंगू की जांच करा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक तीन से छह दिन तक दवा खाने वाले को राहत मिलती है लेकिन थकान, सुस्ती बनी रहती है। एसआरएन और अन्य अस्पतालों से शनिवार को 115 मरीज तीमारदारों के साथ एमएलएन मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग में जांच कराने पहुंचे। इनमें 3 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। इन मरीजों की स्लाइड बनाकर लखनऊ भेजी गई है। फिलहाल शहर में अभी तक डेंगू के 24 मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं। स्वाइन फ्लू के दो मरीज सामने आए। इनमें एक एसआरएन और दूसरे को बेली में भर्ती कराया गया। सभी मरीज परदेस से बीमारी लेकर आए। डेंगू पीड़ितों में 4 मरीज यहां के रहने वाले हैं, उनकी जांच रिपोर्ट लखनऊ से पुष्ट होनी है। ये मरीज फिलहाल भर्ती न होकर दवा लेकर अपने-अपने घर चले गए।

प्रदेश में भले ही स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है लेकिन महरौड़ा के दलित बस्ती के लोग इससे अछूते हैं। घरों के बगल बने सुअर बाड़ा और बजबजाती हुई नाली इस बस्ती की पहचान हैं। गंदगी से बस्ती के लोग बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। स्वच्छ पेयजल और शौचालय का अभाव है। लोग खुले में शौच करते हैं। मजदूरी करके अपना जीवन यापन करने वाले दलित बस्ती के लोग ज्यादातर अनपढ़ हैं। इस लिए सरकारी योजनाओं का लाभ इन लोगों तक नहीं पहुंच पाता है। दलित बस्ती में स्वच्छता अभियान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने की आवश्यकता है। अधिकारी और कर्मचारी इससे अनजान बने हुए हैं।

मांडा क्षेत्र में भी मौसम का बदला तेवर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इलाके के कई गांवों में डायरिया का प्रकोप बढ़ा है। पिछले 24 घंटे में डायरिया पीड़ित एक किशोर की मौत हो गी। मांडा सीएचसी में दस डायरिया पीड़ित मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। इससे कहीं अधिक डायरिया पीड़ित मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे है।
क्षेत्र के सुरवादलापुर ग्राम निवासी संतोष कुमार पटेल का इकलौता पुत्र शुभम पटेल (16) डायरिया के चपेट में आ गया। परिजन उसे गंभीर हालत में एक डॉक्टर के पास ले गए। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। रविवार को कक्षा नौ के छात्र शुभम को पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी व दस्त शुरू हुई। थोड़ी देर में उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन पास में ही क्लीनिक चलाने वाले एक डॉक्टर के पास ले गए। परिजनों डॉक्टर ने शुभम का उपचार शुरू किया। आरोप लगाया कि इंजेक्शन लगाते ही उसने दम तोड़ दिया। इकलौते बेटे की अचानक मौत से घर में कोहराम मच गया। वहीं पिछले चौबीस घंटे में मांडा के विभिन्न इलाके से दस मरीज मांडा सीएचसी में भर्ती किए गए। इनमें खवास तारा की इंद्रा देवी (45) , गिरधरपुर की पुष्पा (46) , मांडाखास के रघुनाथ (50) , निषा देवी (24) , अर्जुन (18) , इशर्फुन बेगम (40) , हड़िया की उर्मिला (46) , कुरहरा की भगवंती देवी (28) , बरबसपुर का पीयूष (4) सिरावल की रहने वाली गुलाब कली (85) शामिल हैं।
सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा के मुताबिक बुखार, डायरिया पीड़ितों के उपचार के लिए निर्देश दिए गए हैं। सीएचसी में मरीजों को भर्ती करने के साथ प्रभावित इलाकों में टीम भेजने को कहा गया है।
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