इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी की ओएमआर सीट में गड़बड़ी न पाए जाने पर उसे तीन साल के लिए परीक्षा में बैठने से डीबार करने का आदेश रद्द कर दिया है। मगर कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एसटीएफ को अपनी जांच जारी रखने के लिए कहा है। एसटीएफ की जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद ही अभ्यर्थी का परिणाम जारी किया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अभिजीत सिंह की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, व समाज कल्याण पर्यवेक्षक पद की परीक्षा में शामिल हुआ था। उसकी मूल ओएमआर सीट व ट्रेजरी में रखी कार्बन सीट में अंतर होने पर लखनऊ के विभूति खंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। जिसकी जांच एसटीएफ कर रही है।
इस आधार पर याची को तीन वर्ष के लिए आयोग की परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया गया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कोर्ट के निर्देश पर ओएमआर सीट पेश की गई। कोर्ट ने देखा दोनों सीट में कोई अंतर नही है। तो कोई अपराध नही बनता है। सचिव ने भी कहा ओएमआर सीट में अंतर नही है। किंतु जांच चल रही है। इस पर कोर्ट ने एसटीएफ को जांच की छूट देते हुए प्रथम दृष्टया लिप्तता के साक्ष्य न होने पर याची को डीबार करने का आदेश रद्द कर दिया है।