इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्राम विकास अधिकारी राजस्व प्राधिकारी के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में उन्हें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के संबंध में कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने एक जल निकासी के लिए बनाई गई नाली को तोड़ने के मामले में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में ग्राम विकास अधिकारी की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की पीठ लाल बहादुर और अन्य की अर्जी पर दिया है।
प्रयागराज निवासी लाल बहादुर और एक अन्य के खिलाफ उतरांव थाने में ग्राम विकास अधिकारी ने सार्वजनिक जल निकासी के लिए बनाई गई नाली को तोड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए समन आदेश जारी किया था। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि ग्राम विकास अधिकारी को ग्राम प्रधान से संबंधित सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने की शिकायतों पर कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में राजस्व संहिता-2006 के अनुसार अतिक्रमणकारी को नोटिस जारी करने का प्रावधान है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अतिक्रमण के मामलों में केवल राजस्व अधिकारियों की ओर से ही कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि ग्राम विकास अधिकारी को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या क्षति पहुंचाने के मामलों में कार्यवाही करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। सार्वजनिक संपत्ति को किसी भी तरह के नुकसान, अतिक्रमण के मामले में यह कार्रवाई केवल राजस्व अधिकारियों की ओर से ही किया जाना चाहिए। ग्राम विकास अधिकारी राजस्व अधिकारियों के दायरे में नहीं आते हैं। कोर्ट ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।