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दो अक्तूबर की रात ही मार दिया था विजय को, आरोपी ने पूछताछ में किया कुबुल

Mon, 12 Oct 2020 10:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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हंडिया के बमैला गांव के विजय पाल की हत्या में पकड़े गए शैलेंद्र उर्फ पिंटू ने राज खोला है कि उसने दो अक्तूबर की रात में ही विजय को मार दिया था। शव पहचान में न आए, इसलिए ज्वलनशील पदार्थ डालकर जला भी दिया था। पुलिस ने विजय के अपहरण और हत्या में शैलेंद्र के साथ तकरीबन एक दर्जन मददगारों को भी पकड़ लिया है। हालांकि तीन मुख्य आरोपियों में से अभी सिर्फ शैलेंद्र ही पकड़ा जा चुका है। हत्या में शामिल विजय कोल तथा एक अन्य की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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 हंडिया पटेल नगर बमैला गांव के रहने वाले विजय पाल की जली हुई लाश मिर्जापुर के मड़िहान के जंगलों में मिली थी। विजय एक अक्तूबर को मिर्जापुर स्थित ससुराल जाने की बात कहकर निकला था। दो अक्तूबर को उसने मुंबई में अपने भाई को फोन किया और कहा कि उसका अपहरण कर लिया गया है। एक लाख 20 हजार तुरंत उसके खाते में ट्रांसफर कर दे। भाई ने 20 हजार रुपये ट्रांसफर कर इसकी सूचना अपने परिवार के करीबी जिला पंचायत सदस्य आरबी पाल को दे दी।

आरबी पाल ने तुरंत हंडिया इंस्पेक्टर को बताया और मिर्जापुर में संबंधित थाने को सूचना दी गई। हालांकि दो अक्तूबर को दोनों ही जगह पुलिस ने मामले को हल्के में लिया। यहां से घर वाले मिर्जापुर के कामापुर स्थित ससुराल पहुंच गए लेकिन पता चला कि विजय वहां पहुंचा ही नहीं था। जिस नंबर से कॉल आई थी, वह नंबर भी बंद था। इसके बाद हंडिया पुलिस के दरोगा उपेंद्र सिंह और दो सिपाहियों को तीन अक्तूबर को मिर्जापुर भेज दिया गया। मामले में क्राइम ब्रांच को भी लगा दिया गया। हालांकि रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई थी।
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 पांच अक्तूबर को एक नए नंबर से विजय के भाई के पास फिर फोन गया कि एक लाख जल्द नहीं दिए तो विजय को मार दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने उस नंबर की लोकेशन निकाल ली। अपहर्ता को मिर्जापुर स्टेशन पैसे देने के लिए बुलाया गया। वहीं मुख्य आरोपी शैलेंद्र उर्फ पिंटू को पकड़ लिया गया। उसकी निशानदेही पर मड़िहान के जंगलों से शव बरामद कर लिया गया।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि विजय की ससुराल के पड़ोस में ही उसका घर है। पिछले महीने विजय पांच दिन के लिए अपनी ससुराल में रुका था। इसी दौरान उसका परिचय हो गया था। दोनों मोबाइल से बात करने लगे थे। शैलेंद्र ने ही एक अक्तूबर को फोन कर विजय को बुलवाया था। विजय का मोबाइल छीनकर उसने दूसरे मोबाइल से एक लाख 20 हजार की फिरौती मांगी। 20 हजार ट्रांसफर हो गए थे। इस बीच विजय ने धमकी दी थी कि वह सबको उनके बारे में बता देगा। इसीलिए दो अक्तूबर की रात में ही विजय को मारकर जला दिया।

इंस्पेक्टर हंडिया शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि हत्या शैलेंद्र ने विजय कोल तथा एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर की थी। विजय के घर मुर्गा दारू की पार्टी करने के बाद रात में उसकी हत्या कर दी गई। विजय तथा दूसरे आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है।  करीब एक दर्जन मददगारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस पर बड़ा सवाल, एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की ?

विजय पाल के अपहरण और हत्या का खुलासा जरूर हो गया है लेकिन पुलिस पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जब हंडिया पुलिस को दो अक्तूबर को सूचना दे दी गई थी तो रिपोर्ट दर्ज करने में चार दिन क्यों लग गए। जबकि यह साफ हो गया था कि विजय का अपहरण कर लिया गया है।

 दो अक्तूबर को फिरौती के लिए फोन आने के बाद वह मोबाइल बंद कर दिया गया। जिला पंचायत सदस्य आरबी पाल ने उसी दिन हंडिया इंस्पेक्टर को सूचना दे दी लेकिन पुलिस ने कहा कि वह जहां से गायब हुआ है, यानी रिपोर्ट मिर्जापुर में दर्ज कराएं। मिर्जापुर पुलिस के पास घर वाले पहुंचे तो बताया गया कि घटना की जहां शुरूआत होती है, रिपोर्ट वहां दर्ज की जाती है। वहां भी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई। पांच को फिरौती की दूसरी कॉल आने के बाद छह अक्तूबर को हंडिया पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। हालांकि इससे पहले ही दरोगा उपेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक टीम विजय की तलाश में मिर्जापुर भेज दी गई थी। नंबरों को क्राइम ब्रांच प्रयागराज की मदद से सर्विलांस पर लगाया गया था। लेकिन रिपोर्ट न दर्ज करने से पुलिस पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

विजय की आईडी पर खरीदा दूसरा सिम, पहले सिम को बंद किया

विजय का अपहरण करने वाला शैलेंद्र उर्फ पिंटू बेहद शातिर अपराधी है। वह हत्या के मामले में कुछ दिन पहले ही जेल से छूटकर आया था। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक विजय के भाई को पहला फोन जिस नंबर से किया था, वह नंबर तुरंत बंद कर दिया। पुलिस आईडी के आधार पर मिर्जापुर के डंगर के घर पहुंच गई। वह बेहद गरीब था। उसने बताया कि शैलेंद्र जबरन उसके मोबाइल से सिम ले गया था। इसके बाद पांच अक्तूबर को जब दूसरी कॉल आई तो उसकी आईडी चेक की गई। शातिर ने नया सिम विजय की आईडी पर उसके नाम से ही लिया था।

देर शाम शव लेकर पहुंचे घर वाले मचा हाहाकार

प्रयागराज। विजय पाल के शव का शनिवार को पोस्टमार्टम किया गया। शनिवार की शाम शव गांव पहुंचा तो हाहाकार मच गया। विजय की शादी छह साल पहले मिर्जापुर के कामा गांव की रहने वाली मुनीता के साथ हुई थी। दोनों के दो बच्चेे अंश (4) और प्रतीक ( छह माह) हैं। पत्नी मुनीता की हालत बेहद खराब है। जिस दिन से विजय घर से निकला, मुनीता को अनहोनी आशंका हो गई थी। जब उसका मोबाइल आफ हुआ, तब से मुनीता लगातार रो रही है। शुक्रवार को पति की लाश मिलने की खबर के बाद मुनीता कई बार बेहोश हो गई। शनिवार देर शाम जब शव पहुंचा तो घर वालों के रुदन से गांववालों की भी आंखें नम हो गई थीं।

कोरोना काल में बैंगलोर से आया था विजय

प्रयागराज। विजय पाल बैंगलोर में रहकर प्राइवेट काम करता था। कोरोना काल में कुछ महीने पहले वह गांव आ गया था। तब से वह यहीं रह रहा था। विजय के तीन छोटे भाई शिवकुमार, राजकुमार और रमेश हैं।
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