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Cyber Crime : ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार रिटायर्ड कर्मचारी 12 दिन से भटक रहा, पुलिस ने नहीं दर्ज की एफआईआर

Sun, 13 Nov 2022 04:05 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर पर बात की गई तो कॉल रिसीव करने वाले श्रीकांत शुक्ला ने एक अन्य नंबर देते हुए बात करने को कहा। उक्त नंबर पर बात करने पर अज्ञात व्यक्ति ने खाता नंबर देकर नेटबैंकिंग के जरिए 10 रुपये का भुगतान करने को कहा।  
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cyber crime - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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रक्षा मंत्रालय से रिटायर अफसर अशोक कुमार सिंह के खाते से साइबर अपराधियों ने सात लाख रुपये उड़ा दिए। शिकायती पत्र दिए 12 दिन बीत गए लेकिन साइबर थाने में रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई। जाने पर हर बार उन्हें टरका दिया गया। अब वह शिकायत लेकर भटक रहे हैं। उतरांव के मोतिहा के रहने वाले अशोक रक्षा मंत्रालय में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उनका एक घर नोएडा में भी है। उन्होंने बताया कि एक नवंबर को सुबह 10 बजे उनके व्हाट्सएप अकाउंट पर मैसेज आया। इसमें लिखा था कि आपका पिछला बिजली बिल अपडेट नहीं है। इसे अपडेट नहीं कराने पर रात 9.30 बजे कनेक्शन काट दिया जाएगा। 

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मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर पर बात की गई तो कॉल रिसीव करने वाले श्रीकांत शुक्ला ने एक अन्य नंबर देते हुए बात करने को कहा। उक्त नंबर पर बात करने पर अज्ञात व्यक्ति ने खाता नंबर देकर नेटबैंकिंग के जरिए 10 रुपये का भुगतान करने को कहा।  रिटायरकर्मी ने जैसे ही नेटबैंकिंग के जरिए लॉगिन किया, कुछ ही देर में उनके एसबीआई खाते से 7.03 लाख रुपये निकाल लिए गए। तब उन्हें समझ में आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। 

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कुछ ही देर बाद उन्होंने नेशनल हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही आईजी रेंज कार्यालय में स्थित साइबर थाने में लिखित शिकायत दी। लेकिन 12 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई। आरोप है कि साइबर थाने जाने पर उन्हें हर बार टरका दिया गया। उधर इस मामले में साइबर थाने के इंस्पेक्टर राजीव तिवारी ने चौंकाने वाला बयान दिया। पहले तो वह तहरीर न मिलने की बात कहते रहे। कुछ देर बाद कहा कि जांच चल रही है। यह पूछने पर कि बिना एफआईआर दर्ज किए किस तरह से जांच चल रही है, वह जवाब नहीं दे पाए। 


पहले जांच, फिर एफआईआर
सूत्रों का कहना है कि साइबर थाने में यह ट्रेंड नया नहीं है। शिकायती पत्र मिलने के बाद भी मामलों में एफआईआर तुरंत नहीं दर्ज की जाती। अगर अपराधी हाथ आया तो रिपोर्ट दर्ज कर तुरंत गुडवर्क दिखा दिया जाता है। अपराधी नहीं पकड़ा गया तो पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर भटकता रहता है। 


प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं आया है। लिखित शिकायत के 12 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं दर्ज हुई तो गंभीर मामला है। संबंधित से पूछताछ की जाएगी। रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राकेश सिंह, आईजी रेंज प्रयागराज
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