देवरिया शेल्टर होम कांड की पीड़िता ने पत्र लिखकर अपने पति के साथ रहने की अनुमति मांगी है। इस पत्र पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार और महानिबंधक हाईकोर्ट से रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने कहा कि किसी को भी अनिश्चित काल के लिए सेल्टर होम में नहीं रखा जा सकता है, मगर पीड़िता की सुरक्षा देखना भी जरूरी है।
कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि पीड़िता के पति और उसकी पारिवारिक स्थिति कैसी है। क्या शेल्टर होम से छोड़े जाने के बाद वह सुरक्षित रहेगी। उसने किन परिस्थितियों में निकाह किया है। स्वत: प्रेरित जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम सहित प्रदेश में चल रही सभी नारी निकेतनों, आश्रय गृहों आदि की मॉनीटरिंग के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। देवरिया शेल्टर होम की चार लड़कियों ने पुलिस थाने पहुंचकर वहां यौन उत्पीड़न और शोषण की शिकायत की थी।
मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने एसआईटी गठित कर दी। जांच में पता चला कि पुलिस ऐसे शेल्टर होम में लड़कियों को भेज रही थी जिनका लाइसेंस निलंबित था। यहां से लड़कियों को रात में होटलों में भेजा जाता था।
कोर्ट ने चारों पीड़िताओं पर खतरे को देखते हुए उनको अज्ञात स्थान पर रखने और पहचान गोपनीय रखने का आदेश दिया है। बिना कोर्ट की अनुमति के उनसे किसी को भी मिलने की मनाही है। गत दिनों एसआईटी ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पीड़िता का बयान दर्ज किया था। उसने मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई है।