बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अध्यापकों को शत-फीसदी सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अब भी छात्र लंबित हैं।
जनपद में कुल 2,97,885 छात्रों के सापेक्ष अब तक केवल 2,30,077 छात्रों का ही सत्यापन हो सका है। जबकि 5, 458 छात्रों को डिलीट किया गया है। इसके बावजूद 62,250 छात्र अब भी शिक्षकों के स्तर पर लंबित हैं। कुल मिलाकर सत्यापन की प्रगति 79.10 फीसदी है। वहीं 20.90 फीसदी कार्य अभी बाकी है।
नगर (सिटी) क्षेत्र की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां 20,343 छात्रों में से मात्र 8,718 का सत्यापन हुआ है। 54.79 फीसदी कार्य लंबित है।
कोरांव में 66.82 फीसदी सत्यापन हुआ है, जबकि 33.18 फीसदी अभी लंबित है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को निर्देशित किया है कि प्रमोटेड छात्र-छात्राओं का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए ताकि योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
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ये ब्लॉक हैं सबसे पीछे
करछना में 54.79 फीसदी, उरुवा में 29.30 फीसदी, मऊआइमा में 31.23 फीसदी और चाका में 27.72 फीसदी, जसरा में 23.10 फीसदी, शंकरगढ़ 23.93 फीसदी, करछना 33.18 फीसदी और सहसों में 28.93 फीसदी सत्यापन नहीं हो पाया है।
सत्यापन में डाटा मिलान, दस्तावेज अपलोड जैसी आती हैं दिक्कतें
-नेशनल मेंटर शत्रुंजय शर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट के कारण डाटा अपलोड या सत्यापन प्रक्रिया में बाधा आती है। आधार, बैंक खाते या अन्य दस्तावेजों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज जानकारी से मेल न खाने पर सत्यापन अटक जाता है।
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पोर्टल पर सत्यापन जरूरी है
-प्रेरणा पोर्टल पर छात्रवृत्ति, ड्रेस, मिड-डे मील या अन्य सुविधाओं का लाभ देने से पहले विद्यार्थियों के डाटा का सत्यापन जरूरी होता है।