कोर्ट नंबर 21 में आज भी देखी जा सकती जूरी बेंच
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर 21 में आज भी जूरी के बैठने का स्थान देखा जा सकता है। आजादी के बाद भी कई वर्षों से तक यह जूरी काम करती थी, जिसमें शहर के मानिंद लोग शामिल होते थे। सुनवाई के दौरान मौजूद रहते और बाद अपना फैसला कोर्ट के समक्ष रखते थे, जो कोर्ट के लिए मायने रखता था।
नानावटी केस के बाद खत्म कर दी गई जूरी बेंच
अपर महाधिवक्ता और केंद्र सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक मेहता बताते हैं कि जूरी फैक्ट और अदालत कानून के आधार पर निर्णय करती थी। 1956-57 में महाराष्ट्र में नानावटी केस के बाद जूरी बंद कर दी गई। इस केस में नौसेना अधिकारी केएम नानावटी ने अपनी पत्नी सिल्विया के प्रेमी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें जूरी ने नानावटी को निर्दोष बताया लेकिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उसे सजा हुई।
महिला को बेचे जाने और सही ठहराने का मामला एक नजरिये को प्रकट करता है। अंग्रेजी राज में महिलाओं को संपत्ति समझा जाता था। भारत में महिला और पुरुष में भेद नहीं है। आजादी के बाद ही भारतीय संविधान ने दोनों को मताधिकार दिए। जबकि ब्रिटेन ने इसे लागू करने में काफी वक्त लगाया। - अशोक मेहता अपर महाधिवक्ता एवं पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत सरकार