इलाहाबाद। चर्चित-सुपरिचित कवि-कथाकार वसु मालवीय को अतीत हुए आज पूरे अठारह बरस बीत गए लेकिन सिर्फ 31 बरस की उम्र में ही जीवन के नेपथ्य में जाने वाले वसु कभी अपनी कविता, कहानियों तो कभी अपने व्यवहार से लगातार हमारे बीच बने हैं। वसु की यादें शब्द के सारथियों, साथियों और परिजनों को जब तब विचलित ही करती रहती हैं।
वरिष्ठ गीतकार और भाई यश कहते हैं, अठारह बरस बीते, वसु का बिछुड़ना भी बालिग हो गया। भावुक होकर बोले, ‘आज फिर सोलह मई है, आज फिर सोलह मई है/याद भाई की कहीं से घूमती फिर आ गई है, आज फिर 16 मई है/आज ही तुमने लिखी थी शिल्प से बाहर कहानी/कथ्य जिसका देखकर घबरा गई थी जिंदगानी/शाम वाले इंद्रधनु का दुख कि गहरा कत्थई है, आज फिर सोलह मई है।
वसु के शब्द संसार को फिर-फिर जीवंतता मिली है। बीते दिनों पराग में छपी कविता ‘पान’ और कमलेश्वर के संपादन में प्रकाशित कालजयी कहानियों के संग्रह में शामिल ‘एक पूरे आदमी का जूता’ ने वसु की यादें ताजा कर दीं। इस पर फिल्म इंस्टीट्यूट पूना की ओर से तैयार डाक्यूमेंटरी राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और कान फिल्म महोत्सव में चर्चित रही। साहित्य भंडार से वसु की कविताओं का संग्रह ‘भाभी के पांव’ भी पाठकों से रूबरू होने को है।
छोटी सी उम्र में ‘बड़ी जिंदगी’ जीकर जाने वाले वसु की याद में सृजन संघर्ष की ओर से शनिवार को शाम पांच बजे मेहंदौरी स्थित आवास पर स्मृति पर्व मनाया जाएगा, जिसमें वसु की कविताओं का पाठ और उसकी स्मृतियां सहेजी जाएंगी।