बसंत पंचमी पर शनिवार को श्रद्धालु पुण्य की डुबकी को तैयार हैं तो प्रशासन
भी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दे चुका है। घाटों की मरम्मत कराकर
उनकी साफ-सफाई का काम पूरा कराया जा चुका है। बैरिकेडिंग भी लगा दी गई है।
श्रद्धालुओं
की सहूलियत के लिए घाटों के आसपास और परेड मैदान पर सैकड़ों शिविर लगाए गए
हैं। प्रशासन राहत की सांस ले रहे हैं कि डुबकी के लिए गंगा में पर्याप्त
जल उपलब्ध है लेकिन गंगा के बढ़ते जलस्तर ने उनकी चुनौती भी बढ़ा दी है।
जलस्तर बढ़ने के साथ कटान की समस्या भी बढ़ गई है और घाटों के क्षतिग्रस्त
होने की आशंका भी बनी हुई है। इसी के मद्देनजर बसंत पंचमी पर संगम घाट की
चौड़ाई कम कर दी गई।
हालांकि स्नानपर्व से एक दिन पहले शुक्रवार को
मेला क्षेत्र में भीड़ काफी कम नजर आई जबकि मौनी अमावस्या पर एक दिन पहले
ही मेला क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु पहुंच गए थे। फिलहाल प्रशासन का
अनुमान है कि बसंत पंचमी पर 50 लाख श्रद्धालु मेले में आ सकते हैं, सो
तैयारियां भी इसी हिसाब से की गई हैं। स्नान के लिए मेला क्षेत्र में संगम,
अरैल सहित कुल 11 घाट तैयार कर लिए गए हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में
आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए घाटों के आसपास 100 और परेड मैदान पर
340 शिविरों की स्थापना कराई गई है।
शुक्रवार को भीड़ भले ही
अपेक्षा से कम दिखी लेकिन अफसरों को यकीन है कि शनिवार को बसंत पंचमी पर
अनुमान के मुताबिक श्रद्धालु मेले में पहुंचेंगे। फिलहाल अफसरों के सामने
सबसे बड़ी चुनौती घाटों को बचाए रखना है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद कटान
में भी तेजी आई है। पांटून पुल नंबर चार और झूंसी रेलवे ब्रिज के बीच कटान
इतना अधिक है कि बिजली विभाग को किनारे पर लगे खंभे हटाने पड़ रहे रहे
हैं।
जलस्तर बढ़ने से संगम घाट पर गहराई भी अधिक हो गई है, सो
प्रशासन ने स्नान क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग को घाटों के
पास कर दिया है, जिससे घाटों की चौड़ाई भी पहले के मुकाबले कम हो गई है।
डीएम भवनाथ सिंह, एडीएम सिटी एसके शर्मा सहित तमाम अफसर शुक्रवार देर रात
तक मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे और तैयारियों को जायजा लेते रहे।
डीएम का कहना है कि कटान से निपटने के सभी इंतजाम हैं। कोई दिक्कत नहीं
आएगी।