इलाहाबाद। सद्गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री दद्दा जी का कहना है सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च है। अगर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी को पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन में कहीं कोई कमी लगती है तो मैं इस बारे में उनसे मार्गदर्शन लेकर उसे दूर करने की कोशिश करूंगा। वह मेरे पूज्य व मार्गदर्शक हैं। उनका सम्मान सर्वोच्च है लेकिन साई पर विवाद अनुचित है।
माघ मेला क्षेत्र तुलसी चौराहा स्थित शिविर में शुक्रवार को प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा, जो इस संसार से चला गया उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं। तीन वर्ष पहले मैं शिर्डी गया था, वहीं साई बाबा के चमत्कारों के बारे में सुना था। जहां तक धर्मांतरण का प्रश्न है, इसके मूल को समझना होगा। दरअसल समाज से उपेक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर ही धर्मांतरण करते हैं। गंगा के सवाल पर दद्दा ने कहा, गंगा मां है, उसकी अविरल निर्मल जल धारा सुनिश्चत होनी चाहिए, जब तक उसे नदी मानेंगे, तब तक आंदोलन होते रहेंगे।
फिल्म अभिनेता व दद्दा शिष्य मंडल के सदस्य आशुतोष राणा का कहना है कि अभियान नहीं आचरण में भी स्वच्छता जरूरी है। साई पर धर्म संसद के निर्णय पर आशुतोष ने इतना ही कहा कि सनातन धर्म के कण-कण में भगवान हैं, लेकिन शंकराचार्य पद की अपनी प्रतिष्ठा है। फिल्मों पर बोले, मेरी फिल्म डर्टी पॉलिटिक्स तेरह फरवरी और धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म ब्रदर जुलाई में रिलीज होगी।
अभिनेता व दद्दा शिष्य मंडल के सदस्य राजपाल यादव का कहना है कि नारियों का सम्मान जरूरी है। जब तक उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता रहेगा, उनकी प्रगति और विकास की बातें बेमानी ही रहेंगी। बेटियों का सम्मान, समाज का सम्मान है।