घटना में याची की पुत्री शारदा भी घायल हुई थी। ट्रायल कोर्ट में उसका भी बयान दर्ज किया गया था। तीन दिनों से चल रही सुनवाई में बुधवार को घायल पुत्री का बयान पूरा पढ़ा गया। याची पक्ष की ओर से दलील दी गई कि घटना में घायल पीड़िता उसका चश्मदीद गवाह थी। ट्रायल कोर्ट ने उसके बयानों पर ध्यान नहीं दिया। कहा कि घटना के समय अंधेरा था। गलत रूप से पहचान की गई, जबकि पुलिस की जांच में लालटेन, टार्च सहित घटना के दौरान रोशनी के लिए इस्तेमाल हुई सामग्रियों की फर्द बनाई थी।
खुद विवेचक ने बयान दिया था कि उसने आरोपी बृजेश सिंह को घटना के समय पकड़ा था। इसके बावजूद कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट का फैसला सही नहीं था। तीन दिनों मेंं याची पक्ष की ओर से कुल 13 लोगों के बयान कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गए। याची पक्ष का बयान पूरा होने के बाद आरोपी पक्ष माफिया बृजेश सिंह के अधिक्ता ने अपना पक्ष रखना शुरू किया। इसके बाद कोर्ट ने समयाभाव की वजह से सुनवाई को एक दिन के लिए टाल दी गई।