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Magh Mela : वैष्णव संतों ने संगम की रेती से किया नारायणी अखाड़े का एलान, अखाड़ा परिषद ने औचित्यहीन कदम

Fri, 20 Jan 2023 09:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मौनी अमावस्या के महास्नान पर्व से पहले संगम की रेती पर शुक्रवार को हुए अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव संत सम्मेलन में वैष्णव संतों ने नए अखाड़े का एलान किया। इसे नाम दिया गया अखिल भारतीय रामानुज नारायणी अखाड़ा।
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माघ मेला क्षेत्र में सनातन धर्म संघ के शिविर में शुक्रवार को संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मौनी अमावस्या के महास्नान पर्व से पहले संगम की रेती पर शुक्रवार को हुए अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव संत सम्मेलन में वैष्णव संतों ने नए अखाड़े का एलान किया। इसे नाम दिया गया अखिल भारतीय रामानुज नारायणी अखाड़ा। इसी के साथ अब अखाड़ों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इससे पहले 13 अखाड़े ही अस्तित्व में थे। इस संत सम्मेलन में इस नए अखाड़े के गठन के अलावा इस सम्मेलन में वैष्णव संतों के हितों की रक्षा के लिए एकजुट प्रयास करने का संकल्प लिया गया। 

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सेक्टर पांच स्थित ओल्ड जीटी मार्ग पर स्थित मध्य प्रदेश सनातन धर्म संघ हनुमान रीवा के शिविर में वैदिक मंगलाचरण और दीप प्रज्जवलन के साथ वैष्णव संत सम्मेलन की शुरुआत हुई। सबसे पहले अखिल भारतीय रामानुज वैष्णव समिति आचार्यबाड़ा के महामंत्री डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने सनातन संस्कृति की रक्षा, वेद प्रचार के अलावा वैष्णव परंपरा को आगे बढ़ाने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इसके बाद वैष्णव संत समाज के हितों की रक्षा के लिए पहली बार अखिल भारतीय रामानुज नारायणी अखाड़े के गठन का एलान किया गया। बक्सर से आए लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी इस अखाड़े के अध्यक्ष बनाए गए। कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य को महामंत्री बनाया गया। इनके अलावात्च्युत प्रपन्नाचार्य इस अखाड़े के उपाध्यक्ष घोषित किए गए। इस अखाड़े के पहले अध्यक्ष जीयर स्वामी ने कहा कि रामानुज परंपरा को आगे बढ़ाने और व्यवस्थित करने के लिए इस अखाड़े की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी।

उन्होंने इस अखाड़े के जरिए सबके साथ न्याय और सहयोग के लिए खड़ा रहने का भरोसा दिलाया। इस मौके पर हैदराबाद से आए श्रीमन्नारायण चिन्न जीयर स्वामी, कर्नाटक से आए यदुगिरि यतिराज जीयर स्वामी, तमिलनाडु से आए संपत कुमार जीयर स्वामी, अयोध्या के जगदगुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर स्वामी,परमार्थ भूषण पुरुषोत्तमाचार्य, जगदगुरु श्रीधराचार्य, डॉ. राघवाचार्य, अच्युत प्रपन्नाचार्य समेत कई संत उपस्थित थे।

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नारायणी अखाड़े का गठन औचित्यहीन, नहीं दी जा सकती मान्यता: रवींद्र पुरी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने वैष्णव संतों की ओर से नारायणी अखाड़े के गठन को औचित्यहीन और मनमर्जी वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में परंपरागत मान्य सिर्फ 13 अखाड़े ही हैं। ऐसे में किसी 14वें अखाड़े के गठन को मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि वैष्णव संत सम्मेलन में किसी भी अखाड़े का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में इस नवगठित संगठन या संस्था को अखाड़े के रूप में संत समाज के बीच प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

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