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आयुर्वेदिक सेमिनार : पंचकर्म में मिनरल ऑयल का इस्तेमाल करना हानिकारक, आयुर्वेद की कार्यशाला में बोले विशेज्ञ

Sun, 08 Sep 2024 08:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कार्यक्रम में लगभग 200 आयुर्वेद चिकित्सक एवं वैज्ञानिक तथा 12 दवा कंपनियां शामिल हुई। यह कार्यक्रम तीन सत्रों में हुआ। जिसमें एनसीआईएम के सदस्य प्रो. अतुल वाष्णेय, बैंगलोर के चिकित्सक डॉ. जयप्रकाश नारायण, जोधपुर के प्रो. दिनेश कुमार राय, डॉ. प्रमेश श्रीवास्तव व प्रयागराज से डॉ. एसके राय एवं जैव रसायन विभाग से डॉ. अनुराग मिश्रा ने अपने पेपर प्रस्तुत किए।
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आयुर्वेदिक कांफ्रेंस में बोलते वक्ता। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पंचकर्म पद्धति के दौरान मिनरल ऑयल का इस्तेमाल करना हानिकारक होता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा रोग सहित कई प्रकार की समस्या खड़ी हो सकती हैं। वर्तमान में कई लोग पंचकर्म क्रिया के दौरान मिनरल ऑयल का उपयोग कर रहे हैं। जबकि पंचकर्म में सबसे उपयुक्त तिल्ली का तेल है। यह बातें रविवार को ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के मालवीय प्रेक्षागृह में इंटरनेशनल अकादमी ऑफ पंचकर्मा (आईएपी) की ओर से एक दिवसीय ऐविडेंस बेस्ड पंचकर्मा की कार्यशाला के दौरान बैंग्लोर से आए डॉ. गिरीश कुमार ने कही।

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कार्यक्रम में लगभग 200 आयुर्वेद चिकित्सक एवं वैज्ञानिक तथा 12 दवा कंपनियां शामिल हुई। यह कार्यक्रम तीन सत्रों में हुआ। जिसमें एनसीआईएम के सदस्य प्रो. अतुल वाष्णेय, बैंगलोर के चिकित्सक डॉ. जयप्रकाश नारायण, जोधपुर के प्रो. दिनेश कुमार राय, डॉ. प्रमेश श्रीवास्तव व प्रयागराज से डॉ. एसके राय एवं जैव रसायन विभाग से डॉ. अनुराग मिश्रा ने अपने पेपर प्रस्तुत किए। वहीं महाराष्ट्र अहमदनगर से डॉ. रमेश राजगुरु उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमएनएनआईटी के भूतपूर्व प्रो. राजीव त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि के रूप में एडीएम कुंभ मेला विवेक चतुर्वेदी व डॉ. सुशील सिन्हा मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आनंद शंकर व संचालन डॉ. संजय बरनवाल ने किया। इस अवसर पर वैद्य आकाश, डॉ. विकास, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. निशांत राय व डॉ. मनीष कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।

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जीवन शैली से संबंधित जितने प्रकार के रोग हैं, उन सभी में पंचकर्म क्रिया बहुत ही कारगर है। क्योंकि पंचकर्म का कार्य शरीर को शुद्ध करना है, जिससे सभी बीमारियों से निजात मिलती है। पंचकर्म के दौरान पांच कर्म किए जाते हैं। इससे मनुष्य को काफी लाभ मिलता है। - डॉ. राकेश कुमार सिंह, नेपाल

जीवन शैली, दूषित खानपान से होने वाले रोग सहित कई ऐसे कारण हैं, जिनसे तमाम प्रकार की परेशानी खड़ी होती हैं। जिनमें आयुर्वेद का बहुत बड़ा महत्व है। जिसमें पंचकर्म तमाम प्रकार की समस्या को जड़ से बाहर निकालने में कारगर है। इस कार्यशाला में पंचकर्म के महत्व पर वैद्य अपना अनुभव साझा करने के लिए यहां उपस्थित हुए हैं। - डॉ. रवि शंकर, बैंगलोर

पंचकर्म चिकित्सा दो प्रकार की होती है। जिसमें पहली संसोधन प्रक्रिया। इसमें किसी भी रोग में दवा देने से पहले पंचकर्म क्रिया का किया जाना महत्वपूर्ण साबित होता है। वहीं दूसरी संचिमन चिकित्सा है इसमें रोग की दवा चलने के बाद रोगी को ठीक करने के लिए पंचकर्म क्रिया के माध्यम से समस्या को दूर किया जाता है। - डॉ. अतुल वार्ष्णेय, सदस्य, एनसीआईएस

कमर दर्द इंसान के जीवन में 500 से 600 घंटे प्रभावित करता है। ऐसे में वैतरणी वस्ती इसमें काफी कारगर है। इस दौरान दूध में शहद, गुण व इमली मिलाकर सेवन कराया जाता है। इससे रोगी को काफी लाभ मिलता है। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री विभाग ने दस कमर दर्द से पीड़ित लोगों पर इस शोध को आजमाया है, जिसका परिणाम सकारात्मक देखने को मिला है। - डॉ. एसके राय, प्रयागराज

 

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