विगत तीन वर्ष की बात करें तो शिशुगृह के 47 बच्चों को गोद लिया गया है। इनमें 26 बालिकाएं हैं। कुल 47 बच्चों में से 14 बच्चों को विदेशी दंपति ने गोद लिया है। गोद लेने वाले विदेशी परिवारों में अमेरिका के तीन, स्पेन और स्वीडन के दो-दो दंपति हैं। इनके अलावा इटली, फ्रांस और दुबई के परिवार ने भी बच्चों को गोद लिया है।
वर्तमान में विदेश के दो अन्य दंपति ने भी यहां के दो बच्चों को गोद लेने की इच्छा जताई है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पूनम पाल का कहना है कि पूरी प्रक्रिया आफा के माध्यम से की जाती है। इसमें भारत सरकार के कई मंत्रालय शामिल हैं साथ ही अलग-अलग स्तर पर छानबीन भी की जाती है।
भागमभाग वाली जिंदगी में इन दिनों सिंगल पैरेंट्स का चलन भी बढ़ा है। शिशुगृह के ही तीन बच्चों को ऐसी महिलाओं ने गोद लिया है, जिन्होंने शादी नहीं की है। इनमें से एक विदेशी महिला भी हैं। वहीं अन्य दो महिलाओं में से एक वैज्ञानिक और दूसरी शिक्षिका हैं।
हालांकि बच्चों को गोद लेने के लिए अकेले पुरुष भी आगे आ रहे हैं, लेकिन उनके लिए यह प्रक्रिया काफी जटिल है। दरअसल अकेले पुरुष सिर्फ बालक को ही गोद ले सकते हैं। वो बालिका को गोद नहीं ले सकते। इसकी वजह से गोद लेने वाले अकेले पुरुषों की संख्या कम है।
समाज में हो रहा बड़ा बदलाव
समाजशास्त्री इसे बड़े और सकारात्मक बदलाव के रूप में ले रहे हैं। एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कालेज की प्राचार्य डॉ.लालिमा सिंह का कहना है कि सिंगल पैरेंट्स के कई कारण हैं। समाज में परिवर्तन तेजी से हो रहा है। संबंधों के मायने और मान्यताएं बदल रही हैं। आज की लड़कियां पति को परमेश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके लिए करियर प्राथमिकता में है। ऐसे में तलाक के केस बढ़े हैं तो शादी न करने वालों की भी संख्या अधिक है लेकिन, सभी को आधार की जरूरत होती है। गोद लेने की प्रक्रिया में दोनों को आधार प्राप्त होता है। यह अच्छा
संकेत है।
गोद लिए गए बच्चों का विवरण
| वर्ष |
बालक |
बालिका |
| 2005 |
1 |
1 |
| 2006 |
3 |
10 |
| 2007 |
3 |
6 |
| 2008 |
6 |
5 |
| 2009 |
4 |
9 |
| 2010 |
9 |
6 |
| 2011 |
5 |
9 |
| 2012 |
6 |
8 |
| 2013 |
12 |
16 |
| 2014 |
9 |
9 |
| 2015 |
7 |
10 |
| 2016 |
2 |
10 |
| 2017 |
8 |
8 |
| 2018 |
4 |
5 |
| 2019 |
9 |
13 |
2019 9 13