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यूपीटीईटी: बारिश के कारण छूटी हजारों की परीक्षा

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) शुरू होने से दो घंटे पहले बुधवार सुबह तेज बारिश के कारण हजारों अभ्यर्थियों की परीक्षा छूट गई। बड़ी संख्या में परीक्षार्थी केंद्रों पर भीगे हुए पहुंचे, लेकिन तक तक देर हो चुकी थी। देर से केंद्रों पर पहुंचे परीक्षार्थियों को बिना किसी सुनवाई के वापस कर दिया गया।
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परीक्षार्थियों के घर से निकलते ही बारिश शुरू होने और एक साथ सड़क पर एक लाख की भीड़ बढ़ जाने के चलते पूरे शहर में जाम लग गया। शहर के अधिकांश परीक्षार्थियों का केंद्र शहर के बाहर नैनी के दूर-दराज इलाके में बना दिए गए थे, ऐसे में अभिभावक एवं परीक्षार्थी दोनों परेशान रहे। नैनी में दूर-दराज और गली-कूचे में बने परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों को पहुंचने के लिए परेशान होना पड़ा। शहर से नैनी क्षेत्र में प्रवेश करते ही लेपरोसी मिशन चौराहे के पास से मेवालाल बगिया चौराहे तक जाम लगा था। ऐसे में परीक्षार्थी को जेल के सामने से ही जाम में फंस गए।
रोने लगीं महिला अभ्यर्थी
सड़कों पर जाम था, केंद्रों पर जल्दी पहुंचे के चलते कई अभिभावकों ने गलियों का रुख किया। ऐसे में वे भटक भी गए। आलम यह हुआ कि उनके साथ बैठी महिला अभ्यर्थी परीक्षा छूटने के डर से रोने लगीं। यह हाल सिर्फ नैनी का नहीं बल्कि शहर के कई इलाकों का था।
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स्कूल, कार्यालय खुले होने से बढ़ी परेशानी
यूपीटीईटी पहली बार रविवार को छोड़कर बुधवार को पड़ने से स्थिति अधिक खराब हो गई। 10 बजे से टीईटी होने और 10 बजे ही स्कूल और कार्यालयों का समय होने से परेशानी और बढ़ गई। हर स्कूल के सामने जाम लगा होने से परीक्षार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बीएड-बीटीसी का मूल प्रमाणपत्र नहीं लाने पर परीक्षार्थियों को लौटाया
यूपीटीईटी में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए सचिव परीक्षा नियामक की ओर से जारी प्रवेशपत्र पर लिखा होने के बाद भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी बिना बीएड-बीटीसी के प्रमाणपत्र के परीक्षा केंद्र पहुंच गए। ऐसे में उनको लौटा दिया गया।
दूर-दराज में बनाया केंद्र, शहर के स्कूल रहे खाली
यूपीटीईटी में जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से तैयार परीक्षा केंद्रों की सूची में शहर के कई महत्वपूर्ण विद्यालयों की अनदेखी की गई है। सीबीएसई के प्रमुख विद्यालयों एवं सड़क किनारे के विद्यालयों को केंद्र नहीं बनाए जाने से परेशानी हुई। शहर से दूर-दराज क्षेत्र में ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया, जहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी।
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