संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में घुमावदार और विश्लेषणात्मक सवालों ने अभ्यर्थियों को खूब छकाया। इस बार सिर्फ रटने से काम नहीं चला। अभ्यर्थी अपने आसपास चले रहे घटनाक्रम पर कितनी नजर रखते हैं और इसके प्रति उनकी समझ कितनी गहरी है, प्रारंभिक परीक्षा में इसकी भी परख हुई। प्रयागराज के 97 केंद्रों में आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में उपस्थिति 48.5 फीसदी रही, जबकि परीक्षा के लिए 44174 अभ्यर्थी पंजीकृत थे।
सुबह 9.30 से 11.30 बजे की पहली पाली में सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्रपत्र और अपराह्न 2.30 से 4.30 बजे की पाली में सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। दूसरा पेपर क्वालीफाइंग होता है। इसमें न्यूनतम 33 फीसदी अंक अनिवार्य हैं, तभी प्रथम प्रश्रपत्र की उत्तर पुस्तिका जांची जाती है। लेकिन, मेरिट प्रथम प्रश्रपत्र में मिले अंकों के आधार पर ही बनती है। इस पहले पेपर में सवाल काफी घुमावदार थे। कोरोना से जुड़ा कोई सीधा सवाल तो नहीं आया, लेकिन उससे संबंधित इंस्टीट्यूट फील्ड से जुड़े कई सवाल पूछे गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार संघ लोक सेवा आयोग ने साबित कर दिया कि आईएएस बनना है तो तैयारी में पूरी ताकत झोंकनी होगी। अपने आसपास राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटित होने वाली घटनाओं का समग्रता से विश्लेषण और अध्यन करना होगा। उन घटनाओं को सेलेबस में शमिल करते हुए स्वयं का नोट्स बनाना होगा। कम से कम दो स्तरीय न्यूजपेपर और एक पत्रिका का गंभीरता पूर्वक अध्यन करते हुए निरंतर सरकारी वेबसाइट को खंगालते रहना होगा।
प्रश्नपत्र में अप्लाइड प्रश्नों की संख्या सर्वाधिक थी। जैसे विगत दो माह से कृषि से जुड़ा मुद्दा गरमाया है। अकेले कृषि से ही तकरीबन सात सवाल पूछ लिए गए। लंबे अंतराल के बाद कृषि से बड़ी संख्या में सवाल पूछे गए हैं। केरल में हाथी के पेट में पटाखा फोड़कर मारने की घटना चर्चा में थी, जिस पर केरल और हाथी पर सवाल पूछा गया।
संसद के सत्र में अनियमितता और राज्यसभा को बाईपास करने संबंधी चर्चित मुद्दों पर भी सीधे प्रश्न बने। इसी तरह अर्थव्यवस्था संबंधित चर्चित मुद्दे भी सवाल का हिस्स बने। मसलन, वैश्विक वित्तीय संकट, आरबीआई द्वारा निवेश बढ़ाने के प्रयास आदि। यही पैटर्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी देखने को मिला। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीएन प्रोफइलिंग आदि से सवाल पूछे गए। इतिहास से तकरीबन 19 सवाल पूछे गए, जिन्हें हल करने में अभ्यर्थियों को दिक्कत नहीं हुई। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुईं रश्मि मिश्रा और सुजाता सिंह ने बताया कि राजव्यवस्था एवं संविधान से तकरीबन 18 सवाल पूछे गए, अर्थव्यवस्था से सर्वाधिक 21 सवाल आए। वहीं, विज्ञान, कृषि एवं पर्यावरण से जुड़े 25 से अधिक सवाल थे। पर्यावरण एवं जैव विविधता से संबंधित 16, भूगोल के आठ और समसामयिक घटनाक्रम से सीधे जुड़े हुए तीन सवाल पूछे गए। पेपर घुमावदार और विशेषणात्मक था।
परंपरागत रहा दूसरा पेपर, रिजनिंग के सवाल बदले
सामान्य अध्ययन का दूसरा प्रश्नपत्र क्वालीफाइंग होता है। इसमें परंपरागत तरीके के सवाल पूछे गए। अभ्यर्थियों को पैसेज के जवाब देने थे। इसके अलावा मैथ्स, रिजनिंग आदि से जुड़े सवाल पूछे गए। रिजनिंग के सवाल में बदलाव नजर आया और अभ्यर्थियों को रिजनिंग के सवाल हल करने में कुछ दिक्कत हुई। वहीं, पैसेज से जुड़े सवाल समसामयिक मुद्दों एवं व्यावहारिकता पर आधारित रहे, जिनमें कृषि, बेरोजगारी, नोटबंदी, आर्थिक विकास जैसे मुद्दे समाहित किए गए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस पेपर में हिंदी अनुवाद काफी खराब था। ऐसे में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए क्वालीफाई करना मुश्किल होगा।
सिविल सेवा परीक्षा में भी गलत हो गया एक सवाल
सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में एक सवाल गलत होने होने का दावा किया गया है। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों से सवाल पूछा गया, ‘गांधी-इरविन समझौते में से क्या सम्मिलित था/थे?’ उत्तर के रूप में चार विकल्प थे। दूसरा विकल था, ‘असहयोग आंदोलन के संबंध में जारी किए गए अध्यादेशों को वापस लेना।’ अंग्रेजी में इसका अनुवाद गलत था। अंग्रेजी अनुवाद में लिखा था, ‘सिविल डिसऑबिडिएंस मूलवमेंट’, जिसका हिंदी में अर्थ है, ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’। जबकि हिंदी भाषा के विकल्प में ‘असहयोग आंदोलन’ लिखा था।
‘पेपर संतुलित था और इस प्रकार तैयार किया थाम, जिसके राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर अभ्यर्थी की समझ और उसकी जानकारी की अच्छी तरह से परख हो सके। करेंट में विशेषणात्मक सवाल काफी अधिक थे। वहीं, दूसरे पेपर में जिसने पुराने पैटर्न को फॉलो किया होगा, उसके लिए क्वालीफाई करना आसान होगा।’ अभिषेक उपाध्याय, सेंटर हेड, निर्माण आईएएस
‘कृषि और अर्थव्यवस्था से अधिक सवाल पूछे गए। पेपर का पैटर्न यही संकेत दे रहा है कि जो इस बार करेंट से जुड़े सवालों को रटकर परीक्षा देने गया होगा, उसके लिए सफलता मुश्किल होगी। प्रारंभिक परीक्षा में आयोग ने यह जानने का प्रयास किया है कि अभ्यर्थी चीजों को एक-दूसरे से कितना कोरिलेट करके देखते हैं।’ सिद्धार्थ श्रीवास्तव, प्रतियोगी परीक्षाओं के पुस्तकों के लेखक