इनके जज्बे और जुनून ने लाखों युवाओं के सपनों को एक बार फिर उम्मीदें दी हैं। लोक सेवा आयोग की गरिमा के विपरीत आचरण करने वाले अनिल यादव के अध्यक्ष के पद से हटने के बाद प्रतियोगियों के सपनाें को फिर से पंख लग गए हैं। यह लड़ाई इतनी आसान नहीं थी लेकिन अवनीश पांडेय, अयोध्या सिंह और अशोक पांडेय के जज्बे एवं संघर्षों ने इस अभियान को वहां तक पहुंचा दिया है, जहां अब आने वाली सरकारें भी दोबारा किसी अनिल यादव जैसे को लोक सेवा आयोग जैसी संस्था का अध्यक्ष नहीं बना पाएंगी और न ही कोई अध्यक्ष अनिल यादव जैसा व्यवहार करेगा।
जैसी आशंका थी उसी के अनुरूप इन्हें लालच के साथ धमकियां भी मिली। संघर्षों के दौरान अपने ही बीच के लोगों ने आरोप भी लगाए लेकिन ये मकसद से नहीं डिगे। इस लड़ाई की शुरुआत 10 जुलाई 2013 को पीसीएस-2011 मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद हुई। अवनीश कहते हैं, ‘रिजल्ट आने के पश्चात यह सोचने पर विवश होना पड़ा की आखिर सेलेक्शन क्यों नहीं हुआ। जब अपनी तैयारी में खामी नहीं मिली तो आयोग की कार्यप्रणाली पर ध्यान दिया गया। इसमें स्पष्ट हो गया कि स्केलिंग की आड़ लेकर अनिल यादव ने चहेतों को नियुक्त कर दिया है।’ अयोध्या कहते हैं, ‘इसके खिलाफ किसी न किसी को आगे आना ही था और हम आगे आए। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति को हजारों लोगों का साथ मिला।’
अवनीश का कहना है, ‘इस लड़ाई में प्रशासन की ओर से कई बार धमकियां मिलीं, कुछ अराजक तत्वों की भी अनिल यादव के शह पर धमकी मिली लेकिन हमने हार नहीं मानी।’ अशोक पांडेय का कहना है कि इस लड़ाई में कई बार हार मिली, जिसके बाद तमाम तरह के आरोप लगे। इससे आहत जरूर हुए लेकिन जज्बा और मजबूत हुआ। प्रतियोगियों का कहना है कि इस लड़ाई में छात्रों के अलावा मीडिया और अधिवक्ताओं ने ताकत बढ़ाई जिसका परिणाम सामने है लेकिन लड़ाई अभी आधी जीती गई है। सीबीआई जांच लक्ष्य है, जिसको पाना अब आसान हो गया। क्योंकि इसमें सबसे बड़ी बाधा बने रहे अनिल यादव चले गए।