इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में एक के बाद एक विवादित फैसलों ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इससे अफसरों की मंशा पर भी सवाल उठने लगा है। भर्तियों में एक तरफ जहां पारदर्शिता की बात कही जा रही हैं, वहीं लोक सेवा आयोग में गोपनीयता के नाम पर अभ्यर्थियों के अधिकार भी छिने जा रहे हैं। आयोग के एक फैसले के तहत चयनितों के नाम तक नहीं बताए जाते। मार्कशीट देखना की प्रक्रिया भी जटिल हो गई है। ऐसे में यह आवाज मुखर हो गई है कि आखिर आयोग इस तरह के फैसले लेकर क्या छिपाना चाहता है।
आयोग में इसी साल 22 अप्रैल को निर्णय लिया गया कि परिणाम सिर्फ अनुक्रमांक और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर घोषित किए जाएंगे। मार्कशीट में भी अभ्यर्थी का नाम नहीं होगा। इस आधार पर कई भर्ती परीक्षाओं के रिजल्ट भी घोषित हो चुके हैं। इससे पहले आयोग ने रिजल्ट तथा मार्कशीट देखने के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) व्यवस्था लागू की, जिससे कि कोई दूसरा अंकपत्र न देख सके। इसके बाद भी अभ्यर्थी रिजल्ट जानने में सफल हो गए तो आदेश जारी किया गया कि परिणाम में जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। अब रोल नंबर के आधार पर रिजल्ट घोषित करने का आदेश हुआ है। इसके अलावा इंटरव्यू में नंबर देने, सेंटर एलाटमेंट, नए जिलों को केंद्र बनाए जाने समेत कई बदलाव हुए हैं जिन्हें लेकर प्रतियोगियों को आपत्ति है और इसके खिलाफ वे हर तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं।