अनिल यादव के कार्यभार संभालने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों में एक जाति विशेष के अभ्यर्थियों की सफलता का ग्राफ अचानक बढ़ गया। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि प्रतियोगियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा का नाम भी उसी जाति पर रख दिया। इस दौरान घोषित पीसीएस-2011, 12 और 13 की ही बात करें तो 86 में से 56 एसडीएम की नियुक्तियां सिर्फ एक ही जाति विशेष से हैं। इसी तरह प्रदेश सरकार की अन्य भर्तियों में भी 50 फीसदी से अधिक पदों पर इसी जाति विशेष के लोगों के चयन का आरोप है। प्रदेश की कई भर्ती संस्थाओं के मुखिया भी इसी जाति विशेष से जुड़े रहे। आरक्षण की पुरानी व्यवस्था लागू करने के बाद पीसीएस-2011 मुख्य परीक्षा का रिजल्ट संशोधित करना पड़ा। इसमें 176 अभ्यर्थी बाहर हो गए।
इनकी जगह 151 नए अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। प्रतियोगियों के अनुसार बाहर किए अभ्यर्थियों में ज्यादातर एक ही जाति के थे। आश्चर्यजनक यह कि इस परीक्षा के एक ही पेपर में स्केलिंग के बाद एक खास जाति के लोगों के 60 से भी अधिक नंबर बढ़ गए। इसके विपरीत उसी पेपर में दूसरों के नंबर घट गए। इतना ही नहीं एक जाति के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में 135 से 141 तक अंक दिए गए। जबकि ज्यादातर अभ्यर्थियों को 121 तक अंक मिले। इसका नतीजा रहा कि इस भर्ती परीक्षा में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची में ज्यादातर एक ही जाति के रहे। इतना ही नहीं सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती के अंतिम परिणाम में एससी की सीट पर ओबीसी अभ्यर्थी का चयन कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद मानवीय चूक बताकर आयोग ने रिजल्ट संशोधित कर दिया लेकिन इसके बाद भी उस अभ्यर्थी का चयन हुआ। उसकी जगह ओबीसी के दूसरे अभ्यर्थी को बाहर किया गया।
आयोग की ओर से कृषि विभाग में तकनीकी सहायकों के 6628 के लिए पर भर्ती की गई। गौर करने वाली बात यह रही कि विज्ञापन के बाद इसमें अन्य वर्ग की सीटें कम करके ओबीसी में शामिल करने का आरोप है। इतना ही नहीं अंतिम परिणाम में कुल चयनितों में 3116 ओबीसी के हैं। हालांकि आयोग ने अंतिम परिणाम में चयनितों के नाम नहीं बताए हैं लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि ओवरलैपिंग करके चयनित तकरीबन 1200 ओबीसी में ज्यादातर एक ही जाति के हैं।
सीधी भर्ती में भी विशेष वर्ग के अभ्यर्थियों को खास तवज्जों दी गई है। प्रतियोगियों ने 23 भर्तियों का डिटेल जुटाया है। इसमें ओबीसी के लिए निर्धारित सीट से डेढ़गुना से भी अधिक पद पर एक खास जाति के अभ्यर्थियाें का चयन हुआ है। प्रवक्ता इलेक्ट्रानिक्स के कुल 41 पद में से 23 का चयन इसी जाति का चयन हुआ है। इसमें ओबीसी की 10 सीट है। इसी तरह से जूनियर इंजीनियर कम्प्यूटर के 48 पद के लिए 20 एक ही जाति के चयनित हुए हैं। यही स्थिति कमोवेश अन्य भर्तियों में भी है।
लोअर सबऑर्डिनेट-2008 और 2009 के अंतिम परिणाम महीनों पहले घोषित हो चुके हैं लेकिन इनमें शामिल अभ्यर्थियों की मार्कशीट अभी तक जारी नहीं की गई। हालांकि आंदोलनरत प्रतियोगियों का दावा है कि उन्होंने 2008 में चयनित एक खास जाति के अभ्यर्थियों की मार्कशीट शासन से हासिल की है। इनमें 72 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 50 में से 34 और 35 अंक मिले हैं। आंदोलनरत प्रतियोगियों ने ऐसे अभ्यर्थियों की सूची भी जारी की है।