अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा-2010 में हुई धांधली के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने अपने तीन पूर्व अफसरों के खिलाफ सीबीआई को जांच शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह जानकारी आयोग की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में सामने आई है।
आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई ने एपीएस भर्ती-2010 में हुई धांधली के मामले में चार अगस्त 2021 को एफआईआर दर्ज की थी और तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट गिरीश गोयल, तत्कालीन अनुभाग अधिकारी विनोद कुमार सिंह और तत्कालीन समीक्षा अधिकारी लाल बहादुर पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-17 ‘ए’ के तहत के लिए जांच की अनुमति मांगी थी।
आखिरकार सीबीआई निदेशक के चेतावनी भरे पत्र के बाद आयोग ने चार साल बाद तत्कालीन अफसरों की जांच करने की अनुमति दे दी है। प्रदेश सरकार ने चार सितंबर 2018 को आयोग की एपीएस भर्ती परीक्षा-2010 में बरती गई अनियमितताओं की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति की थी।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में आयोग के कुछ तत्कालीन अफसरों के खिलाफ भर्ती में अनियमितता बरतने के पुख्ता प्रमाण मिले थे। नियुक्ति विभाग ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दे दी थी लेकिन अपने अफसरों के विरुद्ध जांच की अनुमति नहीं दी थी।