साथ ही जो अभ्यर्थी न्यूनतम 119 अंक पाते हैं, उन्हें भी आठ फीसदी तक गलती होने पर तीसरे चरण की परीक्षा कंप्यूटर टेस्ट के लिए क्वालिफाई करा दिया जाएगा। इसी विशेषाधिकार की आड़ में भर्ती में धांधली हुई। जांच में सामने आया था कि आयोग ने 1244 अभ्यर्थियों को तीसरे चरण के लिए क्वालिफाई कराया, जिनमें से 913 अभ्यर्थियों को न्यूनतम 125 अंक मिले थे। शॉर्ट हैंड टेस्ट में पांच फीसदी या इससे कम गलतियां थीं। वहीं, 331 अभ्यर्थियों को 119 से 125 अंक मिले थे और शॉर्ट हैंड टेस्ट में आठ फीसदी तक गलतियां थीं। सीबीआई ने सवाल उठाए थे कि जब न्यूनतम 125 अंक पाने वाले और अधिकतम पांच फीसदी गलती करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त थी तो बाकी 331 अभ्यर्थियों को क्वालिफाई कराने का क्या औचित्य नहीं था।
मुकदमे के बाद आयोग ने निरस्त कर दी थी अगली परीक्षा
एपीएस भर्ती-2010 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद आयोग ने एपीएस भर्ती परीक्षा-2013 को निरस्त कर दिया था, जबकि दूसरे चरण के तहत शॉर्ट हैंड व टाइप टेस्ट हो चुका था। इसमें भी शॉर्ट हैंड में आठ फीसदी तक गलती अनुमन्य थी। परीक्षा निरस्त करने के बाद आयोग ने दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। पुराने अभ्यर्थियों से नए सिरे से आवेदन लिए थे, लेकिन आयोग के इस निर्णय के खिलाफ मामला कोर्ट में चला गया था। भर्ती कब होगी और कैसे होगी, इस बारे में स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है।
एपीएस परीक्षा-2023 का रिजल्ट भी अटका
- आयोग ने एपीएस परीक्षा-2023 के तहत 28 जून से 18 जुलाई 2024 तक शॉट हैंड व टाइप टेस्ट का आयोजन किया था। एक साल पूरे होने जा रहे हैं और द्वितीय चरण की परीक्षा से संबंधित कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अभ्यर्थियों को एक साल से रिजल्ट का इंतजार है। पिछले मामलों से सबक लेते हुए आयोग ने इस भर्ती के विज्ञापन में आयोग ने शॉर्ट हैंड में गलती होने पर किसी प्रकार की छूट से संबंधित कोई प्रावधान शामिल नहीं किया था। सवाल उठ रहे हैं कि बिना गलती के शॉर्ट हैंड परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए आयोग को पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी मिले भी है या नहीं।