पीसीएस, एपीएस जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में मिले चुके हैं गड़बड़ी के साक्ष्य
दो साल से जांच कर रही सीबीआई, अभ्यर्थियों को ठोस कार्रवाई का इंतजार
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई अब तक आयोग से कई ट्रकों में दस्तावेज भरकर ले जा चुकी है, लेकिन जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। जांच शुरू हुए दो साल पूरे होने जा रहा हैं और इस दौरान सीबीआई ने केवल एक मुकदमा दर्ज किया है। वह भी आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ है। वहीं, अभ्यर्थी दो साल से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
सीबीआई उन परीक्षाओं की जांच का रही है, जिनके परिणाम अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच घोषित किए गए। इसके अलावा सीबीआई ने एपीसीएस-2010 की जांच के लिए शासन से अलग से अनुमति ली, क्योंकि इसका परिणाम मार्च 2017 के बाद आया। लेकिन, अभ्यर्थियों की शिकायत पर सीबीआई ने प्राथमिक जांच-पड़ताल में ही इस परीक्षा में कई गड़बड़ियां पकड़ लीं। सीबीआई जांच में लेटलतीफी के मामले में माह भर पहले हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो जांच एजेंसी ने अचानक फिर सक्रिय हो गई।
पूर्व परीक्षा नियंत्रक को सीबीआई ने तलब कर लिया और कई दिनों में आयोग में उनसे पूछताछ की गई। वहीं, आयोग के कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ हुई। साथ ही गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में तमाम अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन इस बार भी पूछताछ और बयान दर्ज करने की औपचारिकता के बाद जांच धीमी पड़ गई। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अब तक आयोग से तकरीबन पांच ट्रक दस्तावेज भरकर ले चुकी है। उसे पीसीएस-2015, एपीएस-2010 में गड़बड़ी के पुख्ता सुबूत भी मिले हैं लेकिन मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिनपर गड़बड़ी करने का शक हैं, उनमें से कुछ लोग आयोग छोड़ चुके हैं और कुछ लोग वहीं काम कर रहे हैं।