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मॉडरेशन, स्केलिंग में गड़बड़ी पर ही फंसा था आयोग

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UPPSC moderation scaling case
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सीबीआई ने इसी आधार पर दर्ज किया था मुकदमा
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मार्कशीट के मुद्दे पर अभ्यर्थियों ने भी उठाए सवाल
प्रयागराज। पीसीएस-2017 की मार्कशीट में मॉडरेशन और स्केलिंग की प्रक्रिया के बाद निर्धारित अंतिम अंक तो बताए गए, लेकिन अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक दर्ज नहीं किए गए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से किए गए इस बदलाव के बाद अभ्यर्थी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले सीबीआई ने भी मॉडरेशन और स्केलिंग के मुद्दे पर आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे और गड़बड़ी सामने आने पर सीबीआई ने मुकदमा भी दर्ज किया था।
सीबीआई ने पीसीएस-2015 की कॉपियों की जांच के दौरान पाया था कि मॉडरेशन और स्केलिंग के नाम पर जमकर मनमानी की गई। कहीं, बड़े अंतर में नंबर बढ़ाए और कहीं घटाए गए। यह गड़बड़ी सामने आने के बाद सीबीआई ने पीसीएस-2015 के मामले में आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था। सीबीआई की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद मॉडरेशन और स्केलिंग का मुद्दा गंभीर हो गया।
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आयोग ने पीसीएस-2017 की मार्कशीट जारी करने के साथ एक बार फिर इस विवाद को हवा दे दी है और अभ्यर्थियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि मार्कशीट जारी होने के बाद आयोग ने सचिव ने कहा था कि अभ्यर्थियों के बीच भ्रम न हो, इसलिए यह बदलाव किया गया है लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि वास्तविक अंक न बताए जाने से भ्रम की स्थिति और बढ़ेगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को वास्तविक अंक की जानकारी भी दी जाए।
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प्रमुख पदों पर महिला श्रेणी के कटऑफ अंक नहीं
आयोग ने पीसीएस-2015 में क्षैतिज आरक्षण के तहत सभी प्रमुख पदों पर महिला श्रेणी के कटऑफ अलग से जारी किए थे लेकिन पीसीएस-2017 में ऐसा नहीं हुआ। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्षा कौशल सिंह समेत प्रतियोगी छात्र अमित, बृजेश सिंह, प्रवीन सिंह, सत्यम, अनिल आदि ने आयोग अध्यक्ष एवं परीक्षा निंयत्रक को ईमेल पर पत्र भेजकर कहा है कि डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक, असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्य कर अधिकारी, मिला कमांडेंट, खंड विकास अधिकारी प्रमुख पदों के लिए महिला श्रेणी के कटऑफ अंक अलग से जारी नहीं किए गए हैं जबकि पीसीएस-2015 में कटऑफ अंक जारी किए थे। अभ्यर्थियों ने पूछा है कि आखिर आयोग की मंशा क्या हैँ? इससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है।
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