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इस बार भी पुराने ढर्रे पर जंचेंगी कॉपियां

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मॉडरेशन एवं स्केलिंग प्रक्रिया ने यूपीपीएससी नहीं कर सका संशोधन
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पीसीएस-2018 मेंस में थी सुधार की उम्मीद, पर नहीं हुआ बदलाव
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पिछले दिनों कई लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए और परीक्षाओं के आयोजन को भी पटरी पर लाने का प्रयास किया। आयोग को इसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली लेकिन, सुधार को लेकर किए गए दावे अब भी जमीनी तौर पर लागू नहीं किए जा सके हैं। पीसीएस परीक्षा में मॉडरेशन और स्केलिंग में सुधार का दावा भी इन्हीं में से एक है। पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा हो चुकी है और इस बार बार भी कॉपियां पुराने ढर्रे पर ही जांची जाएंगी।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने अपनी ज्वाइनिंग के शुुरुआती दिनों में एक इंटरव्यू के दौरान यह माना था कि मॉडरेशन एवं स्केलिंग की आड़ में गड़बड़ियां होती रही हैं और इसमें सुधार की जरूरत है। अगर आवश्यकता पड़ी तो इन्हें हटाया भी जा सकता है। केवल आयोग अध्यक्ष ही नहीं, सीबीआई ने भी पीसीएस-2015 में मॉडरेशन और स्केलिंग में हुई गड़बड़ियों के आधार पर ही आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
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सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में इस बात का स्पष्ट उल्लेख था कि पीसीएस-2015 की मुख्य परीक्षा में मॉडरेशन की आड़ में अंकों के साथ छेड़छाड़ की गई। नंबर घटाए और बढ़ाए गए। इसकी आड़ में अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से फायदा पहुंचाया गया। कयास लगाए जा रहे थे कि पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा से आयोग मॉडरेशन और स्केलिंग प्रक्रिया में संशोधन कर सकता है ताकि गड़बड़ी की गुंजाइश न रह जाए लेकिन आयोग ने अब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया। मुख्य परीक्षा हो चुकी है। मॉडरेशन एवं स्केलिंग प्रक्रिया में संशोधन के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। ऐसे में इस बार भी कॉपियां पुराने ढर्रे पर जांची जाएंगी।
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