परीक्षक ने उत्तर पुस्तिका पर टिप्पणी अंकित कर फेल किया था लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष के आदेश पर फर्जी तरीके से उत्तीर्ण किया गया। अपर निजी सचिव का भांजा भी हिंदी टाइपिंग में फेल था लेकिन मूल्यांकन में धांधली कर उसे उत्तीर्ण किया गया। अनारक्षित कोटे के तहत आवेदन करने वाले एक अभ्यर्थी को ओबीसी कोटे का लाभ देकर चयनित किया गया।
आरोप यह भी है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष व तत्कालीन सचिव के निजी स्टाफ में कार्यरत रहे एक अपर निजी सचिव ने अति गोपन विभाग से अपनी सामान्य हिंदी की उत्तर पुस्तिका को निकलवाकर उसके भीतर पृष्ठ बदलकर व परीक्षक की राइटिंग की फूहड़ नकल करके 20 अंक अधिक लिखवा लिए जिसमें स्पष्ट रूप से भिन्नता है।
इसके अलावा एक चयनित अभ्यर्थी पर आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप बर्खास्त किए गए पूर्व अपर निजी सचिव के छोटे भाई ने हिंदी शॉर्टहैंड परीक्षा में लगभग 15 फीसदी गलतियां की थीं और उसे 105 अंक मिलने चाहिए थे लेकिन मूल्यांकन में धांधली की गई और त्रुटियों को छह फीसदी दिखाकर 122 अंक देकर पास कर दिया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे में इनका चयन करने के लिए दूसरे पात्र अभ्यर्थी की आरक्षण श्रेणी बदल दी गई।
एपीएस भर्ती में धांधली के कई दूसरे आरोप भी
- कई अभ्यर्थियों ने फर्जी व कूटरचित कंप्यूटर प्रमाणपत्र लगाकर अपना चयन कराया।
- कई अभ्यर्थियों ने मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से 40 फीसदी विकलांग होने कार फर्जी प्रमाणपत्र लगाया।
- एक अभ्यर्थी ने प्राइवेट डिग्री कॉलेज से साठगांठ कर कंप्यूटर सर्टिफिकेट की मार्कशीट पर छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर अंकित करा लिया जबकि विश्वविद्यालय ने संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स कभी संचालित ही नहीं किया गया।
- शॉर्टहैंड व टाइप टेस्ट में केवल आठ फीसदी गलती अनुमन्य थी लेकिन 15 फीसदी तक गलती करने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन किया गया।