एपीएस भर्ती में मिले थे जांच के सुबूत
जांच तेजी से आगे बढ़ी और सबसे पहले पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 में हुई धांधली के सुबूत मिलने पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। इस मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को नामजद किया गया लेकिन सीबीआई ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। सीबीआई ने विभिन्न परीक्षाओं में चयनित टॉपर्स के भी बयान दर्ज किए क्योंकि उनके चयन में धांधली के आरोप लगे थे। इतनी कवायद के बाद जांच धीमी पड़ने लगी तो प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई को प्रति माह रिपोर्ट देने व एसआईटी गठित करने की मांग की। अवनीश का कहना है कि सीबीआई और सरकार दोनों ने प्रतियोगी छात्रों को हताश किया।
छह भर्तियों में सीबीआई ने दर्ज की है पीई
सीबीआई ने यूपीपीएससी की छह भर्ती परीक्षाओं में धांधली की आशंका में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की है। इनमें चार सीधी भर्तियां और पीसीएस-2011 व पीसीएस-2012 शामिल हैं। हालांकि, जांच आगे न बढ़ने के कारण इन भर्ती परीक्षाओं के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
करीब आ रहा चुनाव, फिर उठ सकता है मुद्दा
विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है ऐसे में सीबीआई जांच का मुद्दा फिर उठ सकता है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि हो सकता है कि सीबीआई फिर से अचानक सक्रिय हो जाए लेकिन नौ साल से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को समझ में आ चुका है कि जांच सिर्फ दिखावा है।