इलाज के दौरान 25 मई को सोनू की मौत हो गई। इसके बाद सत्र अदालत ने रोहित सिंह, मंटू उर्फ मनीष पांडेय, आशीष सिंह, दीपु सिंह उर्फ बॉक्सर और आशुतोष पांडेय को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। फैसले के खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि घटना के करीब दो घंटे बाद दर्ज एफआईआर पुलिस कांस्टेबल ने लिखी थी। घायल को पहले थाने ले जाया गया और उसके बाद ईलाज के लिए भेजा गया। कोर्ट ने माना कि दो घंटे की देरी अपने आप में असामान्य नहीं है। घायल को अस्पताल से पहले थाने पर ले जाने की पुलिस संतोषजनक सफाई नहीं दे सकी।
हथियार बरामद पर फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लोहे की रॉड बरामदगी का दावा किया पर कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया। साथ ही हथियार और खून लगी मिट्टी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने के बावजूद यह साबित करने के लिए कोई एफएसएल या सीरोलॉजी रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई कि बरामद हथियारों पर मिला खून मृतक का था।
ट्रायल में नहीं पेश किए गए कई गवाह
कोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस ने ट्रायल के दौरान मृतक को भाई को चश्मदीदी के रूप में पेश किया। इसके अलावा कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किए जा सके, जबकि अभियोजन के अनुसार घटना के वक्त परिवार और गांव के लोग मौके पर पहुंच गए थे।