यूपीपीएससी पीसीएस परीक्षा-2017 में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले नैनी के एडीए कालोनी के रहने वाले अनुपम मिश्रा डिप्टी कलक्टर बन गए हैं। जिससे उनके घर पर जश्र का माहौल है। बधाई देने वालों का ताता लगा हुआ है। भारतीय जीवन बीमा निगम, मुंगरा बादशाहपुर में हेड एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर तैनात प्रमोद कुमार मिश्रा और श्रीमती शशि देवी मिश्रा के तीन संतानों में सबसे बड़े अनुपम मिश्रा यूपी बोर्ड के छात्र रहे हैं।
उन्होंने जीआईसी (राजकीय इंटर कालेज) प्रयागराज से वर्ष 2004 में हाईस्कूल और 2006 में इंटरमीडिएट की परीक्षा साइंस मैथ से पास की है। इंटरमीडिएट परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले अनुपम मिश्रा ने वर्ष 2012 में एमएनएनआईटी, प्रयागराज से कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया था।
चार साल तक अमेरिकन कंपनी क्रोनोज में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करने के बाद वर्ष 2016 में अनुपम ने नौकरी छोड़ दी और आईएएस और पीसीएस परीक्षा की तैयारी में जुट गए। वर्ष 2017 में यूपीपीएससी की परीक्षा देने के बाद आईएएस मेंस के एग्जाम में एक नंबर से रह गए थे।
इन चार सालों में अनुपम हरियाणा, बिहार, राजस्थान की पीसीएस एवं आईएएस में बैठ चुके हैं। इनका रिजल्ट अभी आना बाकी है। अनुपम मिश्रा का कहना है कि अगर डीएम कैटेगरी का रिजल्ट आईएएस में आता है तो ठीक नहीं तो यूपीपीएससी को ही अपना कैरियर बनाएंगे।
पिता के सपनों को याद कर मां-बाप की आंखों में भर आए खुशी के आंसू
करछना तहसील के पीड़ी राम का पूरा गांव निवासी त्रियुगी नारायण मिश्रा पुलिस विभाग में दीवान थे। उनके बड़े बेटे प्रमोद कुमार के दो बेटियों पूजा और प्रीती के बीच इकलौते पुत्र अनुपम मिश्रा पढ़ने में जितने मेधावी थे, स्वास्थ्य के प्रति उतने ही लापरवाह भी थे। अनुपम के पिता प्रमोद कुमार मिश्रा का कहना है कि उनके पिता यानि अनुपम के दादा का सपना था कि उनका पोता डिप्टी कलक्टर बने।
उसी सपने को पूरा करने के लिए अनुपम मिश्रा ने आईएएस एवं पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की थी और पहले ही अटेम्ट में एग्जाम पास कर लिया। वर्ष 2009 में त्रियुगी नारायण मिश्रा का निधन हो गया लेकिन जब गुरुवार शाम को रिजल्ट आया और यह पता चला कि अनुपम मिश्रा का डिप्टी कलक्टर के पद पर सेलेक्शन हो गया है तो अनुपम के पिता प्रमोद कुमार और शशि मिश्रा की आंखों में खुशी के आंसू के साथ स्वर्गीय पिता के देखे और कहे गए सपने की बात याद आ गई।
प्रमोद कुमार का कहना है कि आज भले ही बाबूजी नहीं हैं लेकिन उन्हीं का आशीर्वाद था जो आज अनुपम मिश्रा ने अपनी सफलता का परचम लहराया है।
अनुपम मिश्रा ने बताया कि वह शुरू से ही कोचिंग के खिलाफ रहे हैं
मेरे दादा का सपना था कि मैं डिप्टी कलक्टर बनूं। दादा जब जीवित थे तो अक्सर मुझसे यही बात कहते थे। पढ़ाई पूरी होते ही वर्ष 2012 में एक अमेरिकन कंपनी में अच्छी जॉब मिल गई। 15 लाख सालाना का पैकेज था। वर्ष 2016 में जब मैने जॉब से रिजाइन किया तो उस वक्त मेरा पैकेज 30 लाख सालाना तक करने का ऑफर देकर कंपनी में बने रहने को कहा गया लेकिन, रुपयों से कहीं ज्यादा परलोक वासी दादा की ख्वाहिश पूरी करने की इच्छा थी। इसलिए वर्ष 2016 में 30 लाख सालाना पैकेज की नौकरी छोड़कर घर चला आया और तैयारी में जुट गया।
मित्रों एवं गुरुजनों के सहयोग एवं खुद की मेहनत की वजह से आज मैं सफल हो गया। यह कहना है पीसीएस एग्जाम 2017 में प्रदेश भर में दूसरा स्थान पाने वाले अनुपम मिश्रा का, जिनकी ख्वाहिश अभी आईएएस बनने की है। अमर उजाला से बातचीत में अनुपम मिश्रा ने कहा कि वह अभी आईएएस बनने की कोशिश जरूर करेंगे।
सेल्फ स्टडी पर फोकस और विश्वास करने वाले अनुपम मिश्रा ने बताया कि वह शुरू से ही कोचिंग के खिलाफ रहे हैं। उनका कहना है कि मां-बाप की तपस्या, आशीर्वाद और सही देख रेख का नतीजा है कि आज मैं पीसीएस अफसर बना हूं। उन्होंने बताया कि उनके चचेरे बहनोई पुष्पेंद्र त्रिपाठी भी पीसीएस अफसर हैं।
बातचीत के दौरान ही अनुपम मिश्रा ने कहा कि पीसीएस एवं आईएएस अफसर बनने का सपना देखने वालों को अपनी पढ़ाई पर फोकस करना जरूरी होता है। प्रतिदिन छह से सात घंटे की पढ़ाई करने वाले अनुपम मिश्रा ने एमएनएनआईटी से बीटेक करने के बाद चार साल की नौकरी की और फिर लौटकर साल भर तक दर्शन शास्त्र और समाज शास्त्र विषय पर तैयारी शुरू की और आज रिजल्ट सबके सामने है।
रात में दो बजे तक पढ़ाई करने वाले और सुबह दस बजे तक सोने वाले अनुपम मिश्रा फिलहाल फिटनेश को लेकर गंभीर तो हैं लेकिन अभी अपनी दिनचर्या में इसे ढाला नहीं है। हालांकि उनका कहना है कि अब वह अपने फिटनेश पर ध्यान देंगे।
उन्होंने बताया कि उनकी बहन पूजा बीटीसी करने के बाद टीचिंग जॉब की तैयारी कर रही है जबकि छोटी बहन प्रीति इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बॉटनी हेड प्रो. अनुपम दीक्षित के अंडर में बॉटनी में रिसर्च कर रही है।