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एमए-पीएचडी साथ करना पड़ा महंगा, गई नौकरी

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यूपीएचईएससी ने निरस्त किया चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर का अभ्यर्थन
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अर्थशास्त्र विषय का मामला, आयोग ने जारी किया संशोधित परिणाम
प्रयागराज। एमए एवं पीएचडी की डिग्री एक साथ हासिल करना और उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) को अंधेरे में रखकर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में शामिल होना, एक अभ्यर्थी को महंगा पड़ गया। शिकायत पर जांच कराए जाने के बाद फर्जीवाड़ा सामने आया तो आयोग ने शनिवार को चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर का अभ्यर्थन निरस्त कर दिया।
मामला 18 सितंबर से चल रहा है। अभ्यर्थियों ने आयोग कार्यालय में लिखित शिकायत की थी कि विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र की भर्ती के लिए इंटरव्यू में शामिल अभ्यर्थी डॉ. संतोष कुमार शुक्ला ने एमए और पीएचडी की डिग्री एक साथ हासिल की, जो नियम विरुद्ध है। अभ्यर्थियों ने आयोग के कार्यालय में शिकायत के साथ साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। हालांकि, आयोग ने एक अक्तूबर को जब रिजल्ट जारी किया तो आरोपी अभ्यर्थी को भी अंतिम रूप से चयनित घोषित कर दिया।
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इसके बाद भी शिकायत करने वाले अभ्यर्थी अड़े रहे, जिस पर आयोग कार्यालय ने आरोपी को अक्तूबर में दो नोटिस जारी किए और कारण बताने को कहा। आरोपी अभ्यर्थी ने स्पष्टीकरण दिया लेकिन, इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद नवंबर की शुरुआत में मामला आयोग की बैठक में रखा गया और आयोग की ओर से तीसरा नोटिस जारी किया गया। साथ ही जांच के लिए विषय विशेषज्ञों की कमेटी गठित कर दी गई। विशेषज्ञों से राय लेने के बाद इस मसले पर निर्णय लेने के लिए आयोग में शनिवार को बैठक हुई। डॉ. संतोष कुमार शुक्ला के असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए निर्धारित अर्हता एवं योग्यता न रखने के कारण उनका चयन निरस्त कर दिया गया। चयन निरस्त होने के बाद आयोग ने अपनी वेबसाइट पर संशोधित चयन परिणाम जारी कर दिया है।
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