ब्याज के तौर पर ही मिल रहे हर साल साढ़े तीन करोड़ रुपये
21 अगस्त 2023 को जब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के गठन का अधिनियम आया तो उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के विलय की कार्यवाही शुरू हुई। इसके बाद दोनों संस्थानों की संपत्तियां एवं परिसंपत्तियां शिक्षा सेवा चयन आयोग को सौंप दी गईं। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि कुल धनराशि पर सालाना साढ़े तीन फीसदी ब्याज को ही जोड़ लिया जाए तो प्रति वर्ष तीन करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर आ रहे हैं।
तीन साल में नौ करोड़ रुपये ब्याज के रूप में आ चुके हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि हर माह अध्यक्ष, सदस्यों, अफसरों व कर्मचारियाें का वेतन इसी धनराशि से दिया जाता है। परीक्षा का आयोजन भी इसी धनराशि से कराया जाता है। तीन साल से परीक्षा शुल्क के रुपये संस्थान के खाते में पड़े हैं। आयोग इसी पैसे से चल रहा है. लेकिन अभ्यर्थी तीन साल से परीक्षा के लिए भटक रहे हैं।
अभ्यर्थियों का दावा, डेढ़ करोड़ में हुई थी पिछली परीक्षा
अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि वर्ष 2021 की टीजीटी-पीजीटी परीक्षा पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 2022 के विज्ञापन में परीक्षा शुल्क के रूप में 87 करोड़ रुपये जमा किए गए। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग परीक्षा शुल्क के रूप में मिली धनराशि के एक-एक रुपये के खर्च का हिसाब दे।