जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम को गलत तरीके से खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सर्वेयर द्वारा आंकी गई क्षति राशि का भुगतान ब्याज सहित करे। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम और सदस्य प्रकाशचंद्र त्रिपाठी की पीठ ने सविता केसरवानी के परिवाद पर दिया है। कीडगंज नई बस्ती निवासी सविता केसरवानी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने निजी उपयोग के लिए टवेरा वाहन खरीदा था जिसका बीमा एक निजी बीमा कंपनी से कराया था। बीमा अवधि के दौरान दो फरवरी 2011 को रायबरेली में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
दुर्घटना की सूचना समय पर बीमा कंपनी को दी गई जिसके बाद कंपनी द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया गया। सर्वेयर ने वाहन की जांच कर 96,004 रुपये की क्षति का आकलन किया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया और बाद में नो क्लेम बोनस का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया। आयोग में दायर याचिका में आरोप लगाया कि बीमा कंपनी ने प्रीमियम लेने और सर्वे कराने के बाद भी जानबूझकर भुगतान नहीं किया जो सेवा में स्पष्ट कमी है। वहीं, बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने पूर्व बीमा अवधि में दावा किया था और गलत घोषणा कर बीमा कराया गया, इसलिए क्लेम निरस्त किया गया।
आयोग ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी के तर्कों को अस्वीकार कर दिया। आयोग ने कहा कि बीमा अवधि के दौरान अलग-अलग दुर्घटनाओं के लिए अलग-अलग दावे करना उपभोक्ता का अधिकार है और केवल इस आधार पर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि सर्वेयर द्वारा आंकी गई 96,004 रुपये की क्षति राशि में पूर्व में किसी अन्य कंपनी द्वारा किए गए भुगतान को समायोजित कर शेष राशि पर परिवाद दाखिल करने की तिथि से आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करे।
दो माह में भुगतान के निर्देश
आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी दो माह के अंदर याचिकाकर्ता को राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 2,000 रुपये का भी भुगतान करना होगा।