आयोग के आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका : एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को गिरफ्तार किया जिस पर गंभीर आरोप लगे कि वह परीक्षा में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था। यह गिरफ्तारी परीक्षा संपन्न होने के बाद हुई जिससे आशंका उत्पन्न होती है कि परीक्षा के पहले वह कई अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दे चुका होगा।
हिंदी विषय में सिलेबस से बाहर के प्रश्न : अभ्यर्थियों का दावा था कि हिंदी विषय की परीक्षा में घोषित सिलेबस से बाहर के साथ एक कुंजी गाइड से अधिकतम हल्के प्रश्न पूछे गए। इससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और उनकी परीक्षा प्रभावित हुई। अभ्यर्थियों ने कहा कि यह आयोग की लापरवाही और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का उदाहरण है।
सामान्य अध्ययन में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न : अभ्यर्थियों का दावा था कि सामान्य अध्ययन विषय के घोषित सिलेबस में केवल आधुनिक इतिहास का उल्लेख किया गया था लेकिन वास्तविक परीक्षा में प्राचीन इतिहास से भी प्रश्न पूछे गए। यह सिलेबस के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण है और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्होंने आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयारी की थी।
अभ्यर्थियों ने 25 अप्रैल से शुरू कर दिया था आंदोलन
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में भ्रष्टाचार व अपारदर्शिता का आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग पर इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के नेतृत्व में 25 अप्रैल 2025 को आंदोलन शुरू किया गया और आयोग पर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद एक मई को प्रदर्शन हुआ और आरवाईए के प्रतिनिधिमंडल की आयोग के सचिव मनोज कुमार से वार्ता हुई। इसके बाद आयोग पर कई बार धरना-प्रदर्शन किया गया।