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UP : शंकराचार्य निश्चलानंद बोले- संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़ना गलत

Thu, 22 Jan 2026 07:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने बृहस्पतिवार को माघ मेले में स्थित अपने शिविर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उपजे विवाद काे लेकर अपनी राय रखी। 
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शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोवर्धनमठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने बृहस्पतिवार को माघ मेले में स्थित अपने शिविर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उपजे विवाद काे लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने एक बार फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना लाडला बताया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर उन्हें खींचना बिल्कुल गलत है। कहा कि शंकराचार्य हों या फिर कोई और, यह बात सभी पर लागू होती है। सभी को स्नान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए संगम जाते वक्त शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना को लेकर पत्रकारों के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि कुंभ में शंकराचार्य स्नान करें या न करें, शासन तंत्र को इससे कोई मतलब नहीं होता है। उनका सारा ध्यान नागा साधुओं के स्नान पर ही होता है।

उन्होंने कहा कि जो जिस पीठ के प्रामाणिक शंकराचार्य होते हैं, उनका पूरा अधिकार होता है कि वह किसे अपना उत्तराधिकारी बनाएंगे। इसमें किसी अन्य पीठ के शंकराचार्यों की अनुमति जरूरी नहीं है। अगर कोई शंकराचार्य अपना उत्तराधिकारी बनाए बिना शरीर छोड़ देता है, तो उस पीठ से संबद्ध विद्वत परिषद् होती है। उसको अधिकार होता है कि मिलकर शंकराचार्य बनाएं।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर संतों के बंटने पर किए सवाल को लेकर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि मुझे जहां तक पता है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने अपने जीवनकाल में दो दंडी स्वामी बनाए थे। हालांकि वे भी अपने को ज्योर्ति और द्वारका मठ का शंकराचार्य कहते थे।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वारनंद को लेकर उनका क्या सोचना है, इस पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि वे स्वयं कह चुके हैं कि श्रृंगेरी के शंकराचार्य ने उनका अभिषेक किया। द्वारिका पीठ के शंकराचार्य उनके गुरु भाई हैं। उनको तो अविमुक्तेश्वरानंद को समर्थन प्राप्त ही होगा। कहा कि मेरे पास जब यह प्रकरण आएगा तो जवाब दूंगा। यह भी कहा कि अगर मैंने अभी कुछ निर्णय ले लिया और कोर्ट का निर्णय कुछ और आया तो यह मेरे पद का अपमान होगा।
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कोर्ट में यह मामला कौन ले गया, इस पर भी विचार करना चाहिए

स्वामी निश्चलानंद ने स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद शंकराचार्य हैं या नहीं, इस सवाल पर कहा कि पहले यह सामने आना चाहिए कि पूरे मामले को आखिर कोर्ट कौन ले गया। इस मामले को सुन रहे दोनों जज भी अपना निर्णय नहीं दे रहे हैं। उनके मन में भी होगा कि संतों से दूर रहो बाबा। अन्यथा, भगवा कपड़ा लग जाएगा।

पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि अविमुक्तेश्वारनंद मेरे पास आते तो मैं उन्हें बताता कि उन्हें क्या करना चाहिए। कुछ दिन पहले वो इधर से जा रहे थे, तो मेरे शिविर के सामने रुककर मुझे दडंवत किया। कहा कि मेरे पास वो आएं तो उन्हें बता देता कि क्या करना चाहिए, ताकि मुंह कि न खानी पड़े।

नरेंद्र मोदी ने 500 बाद राम मंदिर बनवाकर अच्छा काम किया

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 साल बाद वहां मंदिर बनवाकर अच्छा काम किया। कहा कि यह काम तो पूरा हो गया लेकिन यह किसके द्वारा हुआ, यह भी एक सवाल है।

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