प्रमुख सचिव गृह से एसएसपी, डीजीपी की शिकायत
कोर्ट ने कहा पुलिस अधिकारी नहीं मानते आदेश
प्रयागराज। 21 साल पुराने दहेज हत्या के मामले में अभियुक्तों के खिलाफ तैयार आरोप पत्र अभियोजन और क्षेत्राधिकारी कार्यालय के बीच से गायब हो गया है। दो वर्ष पहले मामला संज्ञान में आने पर जांच पड़ताल शुरू हुई। कोर्ट ने एसएसपी और आईजी रेंज को जांच का आदेश दिया था। कई बार पत्र लिखने के बाद भी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिख कर कहा है कि वह मामले स्वयं संज्ञान ले कर एसएसपी और आईजी रेंज को निर्देश दें कि प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट और गायब आरोप पत्र कोर्ट में तीन अक्तूबर 2019 तक प्रस्तुत कराएं। इस प्रकरण के संबंध में हाईकोर्ट को रिपोर्ट प्रेषित किया जाना है।
यह आदेश सीजेएम हरेन्द्र नाथ ने वादी के अधिवक्ता केसी मिश्रा को सुनकर दिया है। प्रकरण हंडिया थाने के मंदर गांव का है। वादी आदित्य नाथ तिवारी ने 1997 में अभियुक्तगण रविशंकर मिश्र, जिला मिश्रा, शेषमणि और चमेला देवी के खिलाफ उत्पीड़न, दहेज हत्या और साक्ष्य मिटाने की धारा में मुकदमा दर्ज कराया था। 17 जुलाई 1997 को पुलिस ने शेषमणि और चमेलादेवी को गिरफ्तार किया था और रविशंकर और बुन्देला ने पांच अगस्त 1997 को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। विवेचना बाद पुलिस ने 19 जुलाई 1997 को आरोप पत्र क्षेत्राधिकारी हंडिया के कार्यालय में प्रेषित कर दिया था। इसे सीओ कार्यालय के जेड रजिस्टर में चढ़ा कर अभियोजन कार्यालय को 20 सितंबर 1997 को प्राप्त करा दिया गया। अभियोजन कार्यालय में आरोप पत्र थाने को वापस भेजे जाने के संबंध में उल्लेख किया गया है। इस बात की पुष्टि 30 मार्च 2018 की रिपोर्ट में सीओ ने दी है। इसके बाद किस कर्मचारी ने कब आरोप पत्र कोर्ट में किसे प्राप्त कराया, किसी को पता नहीं है। अदालत पिछले दो वर्षों से इसकी रिपोर्ट मांग रही है। कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को एसएसपी से प्रकरण की जांच करा कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया लेकिन आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखा गया लेकिन कोई रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी है।