तीन साल पहले साहित्यकार प्रो. अली अहमद फातमी समेत कई लोगों के भवनों को जमींदोज करने पर पीडीए को सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खानी पड़ी है। पीडीए ने नजूल भूमि में निर्माण बताकर इन्हें तोड़ा था। अब कोर्ट ने छह हफ्ते के अंदर 10-10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
प्रो. फातमी की 32 वर्षों की कमाई रेत की तरह पीडीए ने ध्वस्त कर दी थी। तब, उन्होंने बताया था कि पांच हजार किताबें भी कार्रवाई के दाैरान बर्बाद हो गईं। उन्हें परिवार सहित करेली के एक रिश्तेदार के यहां शरण लेनी पड़ी थी। बुलडोजर कार्रवाई को देखकर आंखों में आंसू भरकर बेटी बोली थी, अब्बा यह क्या हो गया? सेंट मेरीज में पढ़ने वाली नवासी सारा फातिमा और नवासे सारिम फातमी ने रोकर कहा, अरे मेरी किताबेें, आलमारी कहां जा रही हैं।
लूकरगंज में नोटिस देने के बाद नजूल भूमि से अवैध निर्माण हटाए गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। अभी फैसले की कापी नहीं मिली है। मिलने पर ही कुछ स्पष्ट बता सकूंगा। - अजीत कुमार सिंह, सचिव, पीडीए