जीवन पर लगे दाग मुआवजे से नहीं धुल सकते
कोर्ट ने कहा है कि यह केवल जमानत का मसला नहीं है। बल्कि अनुशासित पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का भी है। कोर्ट ने कहा कि हर आदमी के जीवन की कीमत समान है। बीता दिन लौट कर वापस नहीं आता। जीवन पर लगे दाग मुआवजे से धुल नहीं सकते। कोर्ट ने कहा पिछले 23 वर्षों में पुलिस ने याची पर 49 आपराधिक केस दर्ज किए। अधिकांश में वह बरी हो गया।
कुछ पुलिस ने गलती से शामिल होना मानते हुए वापस ले लिए। मानवाधिकार आयोग ने भी पुलिस पर याची के पक्ष में दस हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया। इसके बावजूद केस में फंसाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसलिए दोनों शीर्ष अधिकारी अदालत में हाजिर हों। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने गौरव उर्फ गौरा की नारकोटिक्स ड्रग्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में दाखिल जमानत अर्जी पर दिया है।
कोर्ट में पेश की केस हिस्ट्री
कोर्ट के निर्देश पर याची पर आपराधिक मुकदमों का चार्ट पेश किया गया। जिससे एक ही थाने खतौली में 49 केस दर्ज होने का खुलासा हुआ है। याची 45 मामलों में से 11 में बरी हो चुका है। नौ केस पुलिस ने वापस ले लिएा। दो में गलती से शामिल किया गया है। एक केस में एनएसए लगाया है, जो रद्द हो चुका है। 21 केस में याची जमानत पर है। एक में अग्रिम जमानत मिली है।
आरोपोें की टोकरी जीवन में अंधकार लाती है
याची व उसकी पत्नी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फ़र्जी केस मेें फंसाने की शिकायत की थी, जिसकी जांच के बाद आयोग ने पुलिस पर हर्जाना लगाया। इससे नाराज होकर पुलिस ने उसको और ज्यादा परेशान करना शुरू कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का रवैया समझ से परे है। बार-बार केस दर्ज कर रही है। अनुशासित पुलिस बल से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सुरक्षा, शांति व समाज में सौहार्द कायम रखने के लिए है। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की टोकरी जीवन में अंधकार ही लाती है। जीवन बर्बाद होता है, जिसपर रोक लगनी चाहिए। अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।