इस आदेश के खिलाफ प्राधिकरण ने राज्य फोरम में अपील दाखिल की जो खारिज हो गई। इसके बाद राष्ट्रीय फोरम में पुनरीक्षण में चुनौती दी। जो कि खारिज हो गई। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। वह भी खारिज कर दी गई। इसके बाद भी प्राधिकरण ने समिति को कब्जा नहीं दिया गया।
कहा कि स्थानीय लोग उस जमीन को पार्क के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं तो जिला फोरम में निष्पादन वाद दायर किया गया, जो लंबित है।इधर, प्राधिकरण ने समिति का आवंटन निरस्त करने का प्रस्ताव किया। कहा नौ फीसदी ब्याज सहित जमा पैसा वापस करेंगे। समिति ने याचिका में चुनौती दी तो प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में कहा कि जमीन पार्क घोषित हो गयी है। समिति को दूसरी जगह जमीन देंगे। इसका भी प्राधिकरण ने पालन नहीं किया। जिस पर जिला फोरम ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत प्राधिकरण से 10 दिन में सफाई मांगी है।
फोरम ने केडीए वीसी उपस्थित नहीं होने पर गैर जमानती वारंट जारी किया है। विपक्षी समिति के अधिवक्ता आशीष शुक्ला ने बताया कि फोरम ने थानाध्यक्ष स्वरूपनगर को वारंट तामील करने का आदेश दिया है। इस धारा में एक माह से एक साल की सजा व 25 हजार से एक लाख तक जुर्माने की सजा हो सकती है। इसे प्राधिकरण ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा पिछले 21 साल से याची विपक्षी समिति को परेशान कर रहा है और पट्टे के बावजूद प्लॉट पर कब्जा नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने भारी हर्जाना लगाया है।