यूपी बोर्ड परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के लिए होने वाले अग्रिम पंजीकरण में प्रधानाचार्य के साथ अभिभावकों के हस्ताक्षर को अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड के नए नियम के अनुसार यदि पंजीकरण फार्म में गलती के चलते प्रमाणपत्र में कोई गड़बड़ी हुई तो उसे संशोधित नहीं किया जाएगा और इसके जिम्मेदार प्रधानाचार्य के साथ-साथ अभिभावक भी होंगे। अग्रिम पंजीकरण का पूरा फार्म भर जाने के बाद उसके प्रिंट आउट पर अब प्रधानाचार्य के साथ अभिभावकों के भी हस्ताक्षर करने होंगे और यहीं फार्म बोर्ड कार्यालय भेजा जाएगा।
बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि नौवीं एवं ग्यारहवीं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का अग्रिम पंजीकरण एक जुलाई से शुरू हो रहा है। बोर्ड की ओर से पंजीकरण में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी रोकने के लिए अबकी बार अभिभावकों को जिम्मेदार बनाया गया है। अब परीक्षा के बाद अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र में आवेदन से जुड़ी किसी प्रकार की गड़बड़ी का संशोधन नहीं किया जाएगा। बोर्ड की ओर से 2019 में अग्रिम पंजीकरण में बदलाव करते हुए आवेदनपत्र पर प्रधानाचार्य के साथ अभिभावकों को जिम्मेदार बनाया गया था। लेकिन, इस बार बोर्ड की ओर से यह सख्त निर्देश है कि आवेदनपत्र को प्रधानाचार्य और अभिभावक पूरी जिम्मेदारी से जांच लें, अब कोई भी जानकारी अधूरी रहेगी अथवा गलत दी जाएगी तो उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
नकलमाफिया के चलते निर्णय, अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
दरअसल, पिछली बोर्ड परीक्षा में नकलमाफिया ने छात्रों से पंजीकरण फार्म में जेंडर कॉलम में ‘एम’ की जगह ‘एफ’ भरवा दिया था। प्रधानाचार्य और अफसरों की मिलीभगत के चलते यह फार्म बोर्ड तक भी पहुंच गए। ऐसे में छात्रों को स्वकेंद्र की सुविधा मिल गई, जबकि स्वकेंद्र व्यवस्था सिर्फ छात्राओं के लिए है। इसका फायदा उठाकर छात्रों ने स्वकेंद्र में जमकर नकल की और बड़ी संख्या में छात्र उत्तीर्ण भी हो गए। परिणाम आने के बाद बोर्ड के ग्रीवंस सेल में प्रमाणपत्र में जेंडर संशोधन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचे। अमर उजाला की ओर से भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया था। 13 जून के अंक में प्रकाशित ‘छात्रों ने जेंडर में ‘एफ’ भरा, मिल गया स्वकेंद्र’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। इसके बाद यूपी बोर्ड ने पंजीकरण की इस गड़बड़ी को दूर करने और नकलमाफिया के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए अभिभावकों के हस्ताक्षर को अनिवार्य कर दिया।