परीक्षा केंद्र तय करने में साफ्टवेयर पर भारी पड़ी जिला विद्यालय निरीक्षकों की रिपोर्ट
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 के केंद्र तय करने के लिए बोर्ड के साफ्टवेयर पर जिला स्तरीय अधिकारियों की रिपोर्ट भारी पड़ गई। आरोप है कि जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से गलत जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने से जिलों में सब सुविधाओं एवं संसाधन से युक्त विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया। जबकि, कम सुविधा वाले नए विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। खंडहर बन चुके विद्यालयों को भी परीक्षा केंद्र बना दिया गया।
परीक्षा केंद्रों की संभावित सूची वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के बाद प्रदेश के हर जिले में आपत्तियों की बाढ़ आ गई है। विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाचार्यों को आरोप है कि कुछ दागी विद्यालयों ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से साठगांठ करके अपने बारे में मनमानी रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड करवा लिया। जांच के बाद जिला विद्यालय निरीक्षकों ने विद्यालयों की ओर से अपलोड की गई जानकारी को सही मानते हुए आगे बोर्ड की वेबसाइट पर सत्यापित कर दिया। जिला विद्यालय निरीक्षकों की रिपोर्ट को सही मानते हुए बोर्ड के साफ्टवेयर ने परीक्षा केंद्र तय कर दिए।
बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्रों की संभावित सूची जारी होने के बाद पता चला कि जिस विद्यालय को लगातार कई वर्ष से परीक्षा केंद्र बनाया जा रहा था, उसका नाम केंद्र की सूची से बाहर करके साफ्टवेयर ने नए विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया। प्रधानाचार्यों ने बताया कि परीक्षा केंद्रों का चयन साफ्टवेयर के आधार पर किया गया है, साफ्टवेयर से परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध संसाधन का परीक्षण किया जा सकता है। ऐसे में साफ्टवेयर ने गलती कैसे नहीं पकड़ी। उधर, जिला समिति का कहना है कि विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों की जांच रिपोर्ट कई स्तर पर परीक्षण के बाद तैयार की गई है। ऐसे में गलती की संभावना नहीं है।
‘‘जिला स्तरीय समिति की ओर से परीक्षा केंद्रों के बारे में जो जानकारी यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड की गई थी, बोर्ड के साफ्टवेयर ने उसी रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा केंद्र तय किया है। जहां से आपत्तियां मिल रही हैं, उसकी जांच करवाकर गलती सुधारी जाएगी।’’
नीना श्रीवास्तव, सचिव, यूपी बोर्ड