कक्ष निरीक्षकों को उत्तर-पुस्तिकाओं पर दर्ज करनी होगी आईडी संख्या
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं में अब कक्ष निरीक्षकों को आईडी संख्या अंकित करनी होगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बुधवार को प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी कर यह जानकारी दी। कहा कि बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के कवर पृष्ठ पर हाईस्कूल में क्रम संख्या 11 और इंटरमीडिएट में क्रम संख्या 10 पर कक्ष निरीक्षक का पूरा नाम, कक्ष संख्या एवं हस्ताक्षर हेतु स्थान में संख्या के सापेक्ष कक्ष निरीक्षक के परिचय पत्र पर मुद्रित क्रमांक लिखा जाएगा।
हिंदी का पेपर आसान, चेहरे खिले
हिंदी विषय में काफी डर लगता है, इसलिए पिछले चार महीने से किताबें रट रही थी। लेकिन जब पेपर देखा तो चेहरा खिला गया। इतना आसान पेपर होगा इसकी उम्मीद नहीं थी। लेकिन बहुविकल्पीय प्रश्नों ने थोड़ा परेशान किया। यह कहना था यूपी बोर्ड की 12वीं की छात्रा स्नेहा सिंह का। इसके अलावा परीक्षा देने वाले अन्य छात्रों ने भी पेपर को आसान बताया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं व 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा बुधवार को हुई। यह परीक्षा केपी इंटर कॉलेज, सीएवी इंटर कॉलेज समेत अन्य स्कूलों में आयोजित की गई। अधिकतर छात्रों ने प्रश्न पत्र को आसान बताया। कुछ छात्रों को दीर्घ उत्तर वाले प्रश्न थोड़े लंबे लगे।
यूपी बोर्ड : प्रदेशभर में 427 जोनल व 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात
माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा की मॉनीटरिंग के लिए कुल 26,420 अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिसमें 427 जोनल मजिस्ट्रेट और 1210 सेक्टर मजिस्ट्रेट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8033 स्टेटिक मजिस्ट्रेट, 69 मंडलीय सचल दल और 440 सचल दल भी निगरानी में लगाए गए हैं।
नकल रोकने के लिए प्रदेश के सभी 8033 परीक्षा केंद्रों के 1,22,753 कमरों में 2,89,454 ऑडियो रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सभी कैमरों की निगरानी कमांड कंट्रोल रूम से की जा रही है। राज्य स्तर पर प्रयागराज और लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जबकि 75 जिलों में भी कमांड कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि इस वर्ष 8033 स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 107 कम हैं। बोर्ड का प्रयास है कि किसी भी हालात में कॉपियां बाहर न लिखी जा सकें और न ही प्रश्नपत्र आउट कराने में शिक्षा माफिया सफल हो पाएं।