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जीआईसी, सहायता प्राप्त विद्यालयों पर भरोसा, वित्तविहीन दरकिनार

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यूपी बोर्ड ने प्रदेश के 7761 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की संस्तुति की
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प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 के लिए मंगलवार को सभी संभावित परीक्षा केंद्रों की सूची जारी कर दी गई। बोर्ड की ओर से प्रदेश के 7761 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की सिफारिश की गई है। बोर्ड ने 2020 की परीक्षा के लिए केंद्र तय करने में राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी) और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों पर भरोसा जताया है, जबकि वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाने से बचने की कोशिश की गई है। बोर्ड की ओर से अबकी बार 7761 जिन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है, उनमें 513 जीआईसी, 3494 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3372 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
यूपी बोर्ड ने वर्ष 2019 में 8354 परीक्षा केंद्र बनाने की संस्तुति की थी, जबकि इस बार बोर्ड ने 7761 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफरिश की है। बोर्ड ने इस बार 593 परीक्षा केंद्र कम कर दिए हैं। बोर्ड की ओर से 2019 में 409 जीआईसी की अपेक्षा 513 विद्यालय अर्थात 104 अधिक जीआईसी को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पिछले वर्ष 3372 की अपेक्षा 3494 विद्यालय और वित्तविहीन में पिछले वर्ष 4573 की अपेक्षा 3754 विद्यालयों अर्थात 813 कम वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है।
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यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव का कहना है कि परीक्षा केंद्रों की संभावित सूची का चुनाव बोर्ड के साफ्टवेयर ने तय अंकों के आधार पर किया है। इसे जारी करने में पूरी सावधानी बरती गई है। बोर्ड की ओर से जारी संभावित सूची पर जिला विद्यालय निरीक्षकों के पास आपत्ति 14 नवंबर तक की जा सकेंगी। जिला विद्यालय निरीक्षक आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद इसकी जानकारी से बोर्ड को अवगत कराएंगे, इसके बाद बोर्ड परीक्षा केंद्रों की रैंडम जांच के बाद 30 नवंबर तक परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी करेगा।
प्रयागराज में 268 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश
प्रयागराज। यूपी बोर्ड द्वारा जिले में 14 जीआईसी, 135 सहायता प्राप्त और 119 वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है। बोर्ड की ओर से जारी सूची को देखने से पता चल रहा है कि शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज, सर्वार्य इंटर कॉलेज, इलाहाबाद इंटर कॉलेज, ऐंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, केपी इंटर कॉलेज, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, क्रास्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज सहित कई शहरी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के बृज मंगल इंटर कॉलेज रामपुर, मदन मोहन मालवीय इंटर कॉलेज करछना, बीएनटी इंटर कॉलेज, लाला राम लाल अग्रवाल इंटर कॉलेज सहित सभी प्रमुख विद्यालयों के साथ जनपद के अधिकांश राजकीय इंटर कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
शहर के विद्यालयों का परीक्षा केंद्र नैनी भेजा
बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्र तय करने में दूरी के मानक का अनुपालन नहीं किया गया है। शहर क्षेत्र के कई सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का केंद्र नैनी के वित्तविहीन विद्यालय में बना दिया गया। जिन विद्यालयों का केंद्र नैनी भेजा गया है उनमें इलाहाबाद इंटर कॉलेज, डॉ. केएन काटजू इंटर कॉलेज, डॉ. केपी जायसवाल इंटर कॉलेज एवं मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज शामिल हैं। बोर्ड की ओर से सड़क से हटकर जहां कई विवादित वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है, वहीं सड़क किनारे स्थित काशी प्रसाद सिंह इंटर कॉलेज कठौली जैसे विद्यालय को दो वर्ष से परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है।
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विद्या भारती के विद्यालय संभावित परीक्षा केंद्रों की सूची में नहीं
परीक्षा केंद्र बनाने में यूपी बोर्ड ने संघ के स्कूलों को किया दरकिनार
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की ओर से जारी संभावित परीक्षा केंद्रों की सूची में शहर एवं नैनी क्षेत्र के संघ से जुड़े विद्या भारती के अधिकांश विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। शहर में नैनी क्षेत्र को मिलाकर विद्या भारती के कुल चार इंटर कॉलेज हैं, जिनको पूर्व में परीक्षा केंद्र बनाया जाता रहा है। इन विद्यालयों में ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज सिविल लाइंस, रानी रेवती सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर, माधव ज्ञान केंद्र सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नैनी और ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज गंगापुरी, रसूलाबाद को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। 2018 की परीक्षा से पूर्व इन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया था, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की ओर से विरोध के बाद बाद में उन्हें परीक्षा केंद्र बनाया गया। इसी प्रकार 2019 की परीक्षा में भी ज्वाला देवी गंगापुरी को छोड़कर शेष सभी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, अबकी उनका नाम सूची से बाहर कर दिया है। माधव ज्ञान केंद्र के प्रधानाचार्य प्रदीप तिवारी, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर सिविल लाइंस के प्रधानाचार्य युगल किशोर मिश्र ने केंद्र तय करने की प्रक्रिया का विरोध किया है।
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