यूपी बोर्ड कार्यालय खुलने के साथ हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर कयास लगाया जाना शुरू हो गया है। बोर्ड के अधिकारी भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर में 25 अप्रैल से कैसे मूल्यांकन होगा। उनका कहना है कि प्रदेश में इस समय 40 से अधिक जिले कोरोना प्रभावित हैं, इन जिलों में मूल्यांकन कैसे शुरू होगा। बोर्ड के अधिकारी भी मान रहे हैं कि तीन मई को लॉकडाउन का दूसरा चरण पूरा होने के बाद ही मूल्यांकन के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
प्रदेश में लखनऊ, आगरा, नोयडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी सहित कई प्रमुख जिले कोविड-19 की चपेट में हैं। ऐसे में इन जिलों में मूल्यांकन के लिए सरकार के दबाव के बाद भी शिक्षक आगे नहीं आएंगे। इन जिलों में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में शिक्षक मूल्यांकन कैसे कर पाएंगे। मार्च में परीक्षा पूरी होने के बाद जब 19 मार्च को मूल्यांकन रोका गया तो सबसे अधिक विरोध प्रयागराज में हुआ था।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश मंत्री लालमणि द्विवेदी के लगातार विरोध और प्रदेश में लॉकडाउन लागू होने के बाद मूल्यांकन रोक दिया गया। अटेवा पेंशन बचाओ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हरि प्रकाश यादव का कहना है कि कोरोना के चलते उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शिक्षकों को घर पर कॉपी ले जाने की सुविधा दी जाए। मूल्यांकन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना कठिन होगा।