बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने कोरोना काल में न्यायालयों के बंद होने से परेशान वकीलों की खुद मदद करने का निर्णय लिया है। इससे पूर्व कौंसिल ने आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई थी, मगर राज्य सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई। नवनिर्वावित अध्यक्ष जानकीशरण पांडेय ने निर्णय लिया कि जो कुछ भी धनराशि बार कौंसिल के पास उपलब्ध है, अब उसी से जरूरतमंद वकीलों को मदद दी जाएगी।
अध्यक्ष का कहना है कि प्रदेश के सीओपी (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस) धारक जरूरतमंद अधिवक्ताओं को उनकी संख्या के अनुपात में संबंधित बार एसोसिएशन या वहां की एल्डर्स कमेटी के माध्यम से सहायता राशि दी जाएगी।
धनराशि सीधे बार एसोसिएशनों को उपलब्ध कराई जाएगी। फिर वह एसोसिएशन अपने यहां के जरूरत मंद वकीलों को चिह्नित कर धनराशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजेंगे। धनराशि के चेक के साथ इसे वितरित करने की नियमावली भी दी जाएगी, जिसका पालन करना जरूरी होगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हाईकोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को वकीलों की मदद के लिए धनराशि देने का निर्देेश दिया था, मगर सरकार की ओर से राशि नहीं दी गई। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उक्त आदेश को वापस लेने की अर्जी भी दाखिल की है, जिस पर अभी सुनवाई होनी है।
इस बीच प्रदेश की ज्यादातर अदालतों में न्यायिक कार्य कोरोना संक्रमण के कारण प्रभावित होने की वजह से अधिवक्ताओं की आमदनी पर असर पड़ा है और बड़ी संख्या में वकील आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। इसे देखते हुए कौंसिल उपलब्ध संसाधनों से ही मदद करने का निर्णय लिया है।